पीलीभीत। सांसद वरुण गांधी एक बार फिर कैबिनेट में जगह पाने से चूक गए। पिछले कई दिनों से सोशल मीडिया पर सांसद वरुण गांधी को मंत्री बनाए जाने को लेकर शोर मचा था। हालांकि सांसद और उनके समर्थक सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं को लेकर कोई वक्तव्य नहीं दे रहे थे। बुधवार को पूरे दिन उनके संसदीय कार्यालय पर सामान्य दिनों की तरह जनता की सुनवाई चलती रही।
सांसद वरुण गांधी जिले में दूसरी और राजनीतिक कैरियर में तीसरी बार सांसद बने हैं। 2014 में वह सुल्तानपुर के सांसद बने थे। उन्होंने यहां पहला चुनाव 2009 में लड़ा था, तब उन्हें रिकार्ड मतों से जीत मिली थी। इस चुनाव में एक विवादित भाषण को लेकर उन पर बरखेड़ा और कोतवाली में दो मुकदमे दर्ज हुए थे। इन मुकदमों में भाजपा नेता कलराज मिश्र भी आरोपी बनाए गए थे। इन मुकदमों में कोर्ट में सुनवाई के बाद सांसद वरुण गांधी को राहत मिल गई थी।
इससे पहले 2014 से 2019 तक उनकी मां मेनका गांधी यहां की सांसद रहीं और मोदी सरकार में महिला एवं बाल विकास मंत्री बनाई गई थीं। तब वरुण गांधी सुल्तानपुर के सांसद बन थे। 2019 के चुनाव में मेनका गांधी सुल्तानपुर चली गई, जबकि वरुण गांधी यहां से सांसद चुने गए। इस बार भी जीत का अंतर एक लाख से अधिक था।
पिछले कई दिनों से मोदी कैबिनेट के विस्तार की चर्चाएं सोशल मीडिया पर तेजी से चल रही थी। इसमें सांसद वरुण गांधी का नाम चर्चा में था। हालांकि संसदीय क्षेत्र पीलीभीत के कई दौरे होने पर सांसद और उनकी टीम ने कभी इस पर कोई टिप्पणी नहीं की। ऐसे में इसे लेकर उनकी तरफ से ऐसा नहीं लग रहा था कि वह इसे लेकर जोर आजमाइश कर रहे हैं। बुधवार को पूरे दिन मोदी कैबिनेट के विस्तार की खबरों पर नजरें रही, मगर संसदीय कार्यालय पर इसका कोई असर नहीं दिखाई दिया। ऐसे में इसे सोशल मीडिया पर चल रही महज एक चर्चा तक ही सीमित माना गया।