कल से बिखरेगी पूर्वांचल की छटा
- फोटो : पीलीभ्ाीत/उत्ततर प्रदेश्ा
भगवान सूर्य देव के प्रति भक्तों की अटल आस्था का अनूठा पर्व छठ पूजा चार नवंबर से शुरू हो रहा है। पर्व को लेकर यहां निवास कर रहे पूर्वांचल के लोगों ने इसकी तैयारियां भी तेजी से शुरू कर दी हैं। पर्व के पहले दिन की शुरूआत नहाय खाय से होगी।
शहर के रेलवे कॉलोनी में पूर्वांचल के करीब 70 से अधिक परिवार वर्षों से निवास करते हैं। यहां रहने वाले लोग अपने पारपंरिक त्योहारों को भी हर साल उत्साहपूर्वक मनाते हैं। सूर्योपासना का सबसे बड़ा पर्व छठ पूजा भी यहां धूमधाम से मनाई जाती है। दीपावली के ठीक छह दिन बाद मनाए जाने वाले इस महाव्रत के दौरान लोग पारिवारिक सुख समृद्धि व मनोवांछित फल पाने के लिए यह पर्व मनाते हैं। रेलवे स्टेशन के पूर्वी गेट के समीप स्थित जलाशय में पूजा पाठ की रस्म अदा की जाती है। जलाशय को साफ सुथरा कर इसे सजाने संवारने का काम तेजी से चल रहा है।
ऐसे मनाया जाएगा छठ पर्व
छठ महापर्व में षष्ठी माता व भगवान सूर्य को प्रसन्न करने के लिए स्त्री व पुरुष दोनों की व्रत रखते हैं। पर्व के तहत चार नवंबर को नहाय खाय का कार्यक्रम होगा। शुक्रवार को अरवा चावल, अरहर की दाल व कद्दू की सब्जी बनाई जाती है। जिसे कटुवा भात कहा जाताप है। पांच नवंबर को होने वाले खरना के तहत व्रती दिन भर उपवास रखेंगे। दिन भर अन्न जल ग्रहण नहीं करेंगे। शाम को गुड़ व नए चावल की खीर बनाकर फल व मिष्ठान से छठी माता की पूजा करेंगे। छह नवंबर यानि रविवार को दिन भी अध्र्य देने की तैयारी होगी। शाम को अस्त होते सूर्य को अर्घय दिया जाएगा। सप्तमी यानि सात नवंबर को भोर होने से पूर्व ही पकवान, नारियल, केला, मिठाई आदि लेकर जलाशय पर एकत्र होंगे और उगते सूर्य को उषा अध्र्य देंगे। इसी दिन व्रत का परायण होगा।