पीलीभीत/माधोटांडा। आबादी क्षेत्र में घुसकर इंसानी हमलों के आदी हो चुके बाघों को अब पकड़ने के बाद चिड़ियाघर में सलाखों के पीछे नहीं रखा जाएगा, बल्कि उन्हें सुधरने का मौका मिलेगा। बाघों को पकड़ने के बाद जंगल जैसे वातावरण में रखकर उनमें सुधार कराने के प्रयास किए जाएंगे, ताकि वे आबादी क्षेत्र में दोबारा न जाएं और जंगल में ही रहें। इसको लेकर शासन ने पीलीभीत टाइगर रिजर्व में रिवाइंडिंग सेंटर (खुली जेल) खोलने पर मंथन शुरू किया है।
पीलीभीत के जंगलों को जून 2014 में टाइगर रिजर्व का दर्जा दिया गया था। तब यह माना गया था कि टाइगर रिजर्व बनने के बाद जंगल में बहुतायत संख्या में पाए जाने वाले बाघों का संरक्षण होगा और जंगल के किनारे बसे गांवों की जनसंख्या के जीवन स्तर में सुधार आएगा। मगर, टाइगर रिजर्व बनने के बाद हकीकत कुछ और ही निकली। पीटीआर के बाघ जंगल से निकलकर आबादी क्षेत्र में घुसकर इंसानों को अपना निवाला बनाने लगे। पीटीआर बनने के बाद अब तक बाघ हमलों में 31 व्यक्ति अपनी जान गंवा चुके हैं। आखिर बाघ जंगल से निकलकर आबादी की ओर रुख क्यों कर रहे हैं, इस मुद्दे पर अभी कोई ठोस बात निकलकर सामने नहीं आई है। पीटीआर प्रशासन द्वारा इतना जरूर किया जा रहा है कि जो बाघ आबादी क्षेत्र में घुसकर इंसानों पर हमला करते हैं, उनमें से अधिकांश को पकड़ चिड़ियाघर में डाल देता है। आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2014 से अब तक आठ बाघों को पकड़ा गया है। इसमें छह बाघों को चिड़ियाघरों में भेजा गया। वहीं अमरिया क्षेत्र में 12 बाघ पिछले एक दशक से आबादी क्षेत्र में ही डेरा जमाए हुए हैं।
रिवाइंडिंग सेंटर में रखे जाएंगे इंसानी हमलों के आदी बाघ
आबादी क्षेत्र में घुसकर इंसानों पर हमला करने वाले बाघों को पकड़कर चिड़ियाघर भेजना स्थायी उपाय नहीं है। शासन ने मंथन के बाद इन बाघों को पकड़ने के बाद चिड़ियाघरों में रखने के बजाए एक ऐसे प्राकृतिक वासस्थल पर रखने की योजना बनाई है, जहां उनकी आदतों में सुधार हो सके। ऐसे बाघों को एक-डेढ़ साल तक जंगल जैसे हालात में रखा जाएगा। इसके बाद उन्हें पुन: जंगल में छोड़ दिया जाएगा। शासन पीटीआर में ही रिवाइंडिंग सेंटर बनाने पर मंथन कर रहा है। पीटीआर प्रशासन के मुताबिक रिवाइंडिंग सेंटर के लिए बराही और माला जंगलों में जगह भी तलाश कर ली गई है। यदि सब कुछ ठीकठाक रहा तो आने वाले समय में रिवाइंडिंग सेंटर बनेगा। इसी के साथ ही मानव-वन्यजीव संघर्ष पर अंकुश लगेगा, वहीं पीटीआर की शान कहे जाने बाघ भी चिड़ियाघरों के बजाय जंगल में ही रह सकेंगे।
पीटीआर में रिवाइंडिंग सेंटर स्थापित करने के लिए दो रेंजों में जमीन तय करके प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। आबादी क्षेत्र में घुसकर इंसानी हमले के आदी हो चुके बाघों को इस सेंटर में रखा जाएगा। जहां उन्हें जंगल जैसा ही वातावरण मिलेगा। फिलहाल इस मामले में अभी शासन स्तर पर मंथन चल रहा है। -नवीन खंडेलवाल, डिप्टी डायेरक्टर