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पीलीभीत: मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोपों से घिरे दोनों एसडीएम का लखनऊ तबादला, अब विवेचना होगी तेज

Sat, 31 Oct 2026 01:53 PM IST
Mukesh Kumar संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत

सार

पीलीभीत में मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोपों से घिरे दोनों एसडीएम का लखनऊ तबादला कर दिया गया है। इन पर सदर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोप हैं।
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हेमंत चौधरी और मयंक गोस्वामी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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पीलीभीत में सदर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोपों से घिरे जिले के दोनों उपजिलाधिकारियों (डिप्टी कलक्टर) का शासन ने लखनऊ तबादला कर दिया। एसडीएम हेमंत कुमार चौधरी और एसडीएम मयंक गोस्वामी के खिलाफ मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी के मामले में शहर कोतवाली में रिपोर्ट भी दर्ज है।

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डीएम आलोक कुमार ने बताया कि शासन की ओर से जारी तबादला सूची के अनुसार, एसडीएम हेमंत कुमार चौधरी को उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण में विशेष कार्याधिकारी बनाया गया है। वहीं, एसडीएम मयंक गोस्वामी को बंदोबस्त अधिकारी (चकबंदी), चकबंदी मुख्यालय लखनऊ के पद पर भेजा गया है।

शहर कोतवाली में दर्ज कराई गई थी रिपोर्ट 
बता दें कि सदर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं का मामला सामने आने के बाद दोनों अधिकारियों की भूमिका सवालों के घेरे में आई थी। तभी दोनों को एसडीएम पद से हटाकर जिला मुख्यालय से सम्बद्ध कर दिया गया था। साथ ही दोनों के खिलाफ शहर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। मतदाता सूची में गड़बड़ी के इस प्रकरण की जांच भी चल रही है।
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दो नए डिप्टी कलक्टर की पीलीभीत में हुई तैनाती
शासन ने प्रशासनिक फेरबदल करते हुए पीलीभीत में दो नए डिप्टी कलक्टर की तैनाती की है। उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण में रहे मांधाता प्रताप सिंह और बंदोबस्त अधिकारी (चकबंदी) मुख्यालय लखनऊ रहे अजय कुमार को पीलीभीत भेजा गया है। यहां आने के बाद ही डीएम इन्हें नियुक्त करेंगे।

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अब तेज होगी एफआईआर की विवेचना
इस मामले में जिलाधिकारी ने दोनों अधिकारियों के निलंबन की संस्तुति की थी, मगर फिलहाल उन्हें पीलीभीत से हटाकर लखनऊ भेजा गया है। हालांकि माना जा रहा है एफआईआर की विवेचना को प्रभावी बनाने के लिए उन्हें जिले से हटाकर नई तैनाती दी गई है।

दरअसल, आयोग के निर्देश पर जिलाधिकारी आलोक कुमार की जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि 31 मई से 28 अगस्त के बीच प्राप्त 13,779 ऑफलाइन फॉर्मों में से 3,309 फॉर्म बिना निर्धारित विधिक प्रक्रिया अपनाए सीधे निरस्त कर दिए गए थे। इसमें दोनों तत्कालीन उपजिलाधिकारियों (एसडीएम) की सीधी लापरवाही और संलिप्तता पाई गई है। 

जांच में पुष्टि होने के बाद जिलाधिकारी ने तत्काल प्रभाव से दोनों एसडीएम को उनके प्रभार से हटाकर जिला मुख्यालय से सम्बद्ध कर दिया था। इसके साथ ही, सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी की तहरीर पर दोनों एसडीएम और कंप्यूटर ऑपरेटर अनिल कुमार के खिलाफ नगर कोतवाली में 22 अक्तूबर को धोखाधड़ी और लोक सेवक द्वारा कदाचार समेत सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया था। वहीं, संविदा कंप्यूटर ऑपरेटर की सेवाएं तुरंत समाप्त कर दी गई थीं। जिला प्रशासन ने विभागीय कार्रवाई के लिए निर्वाचन आयोग और शासन को विस्तृत रिपोर्ट भेजी थी। 
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जांच के घेरे में 5 एईआरओ और 150 पोलिंग बूथ 
इस फर्जीवाड़े में जांच का दायरा अब और विस्तृत हो गया है। पांच सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (एईआरओ) की भूमिका और करीब 150 बूथों पर मतदाता सूची संशोधन के ब्योरे की पड़ताल की जा रही है।

जिलाधिकारी आलोक कुमार ने बताया कि शासन स्तर से जिले के दोनों एसडीएम का तबादला हुआ है, जबकि उनके स्थान पर दो नए अधिकारी जिले में भेजे गए हैं। मामले में दर्ज एफआईआर और विभागीय जांच की प्रक्रिया नियमानुसार जारी रहेगी। 
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