शासन स्तर पर चल रहा है विचार, पीलीभीत के डीएफओ से मांगा गया प्रस्ताव
इंसानों पर हमले करने वाले बाघों को पकड़कर रखा जाएगा टाइगर सफारी में
पर्यटन भी बढ़ने की उम्मीद, लखनऊ में हो चुकी है उच्चाधिकारियों की एक बैठक
पीलीभीत में वनों से ढकी तराई के प्राकृतिक सौंदर्य, वन्य जीवों की प्रचुरता और घने जंगलों के बीच अंडमान सरीखे द्वीप का एहसास कराने वाले अद्भुत चूका स्पॉट के मुरीदों को यहां जल्द एक और सौगात मिल सकती है। शासन स्तर पर यहां टाइगर सफारी बनाने पर विचार चल रहा है। पीलीभीत टाइगर रिजर्व के डीएफओ से इस संबंध में प्रस्ताव मांगा गया है।
पिछले दिनों लखनऊ में वन विभाग के उच्चाधिकारियों के साथ एक बैठक भी की जा चुकी है। इस प्रस्ताव पर अगर सकारात्मक फैसला हुआ तो पीलीभीत में बनने वाला टाइगर सफारी उत्तर प्रदेश का पहला टाइगर सफारी होगा।
सूत्रों के मुताबिक पीलीभीत में टाइगर सफारी बनाने की पहल यहां पिछले कुछ समय के दौरान बाघों के जंगल से सटे इलाकों में इंसानों पर हमले बढ़ने के बाद हुई है। माना जा रहा है कि पिछले कुछ सालों में पीलीभीत के जंगलों में बाघों की संख्या बढ़ी है और इस वजह से उनके लिए प्रे बेस (खाने की उपलब्धता) कम हुई है। अफसरों को इस समस्या का हल यहां टाइगर सफारी बनाने से होता दिखाई दे रहा है। टाइगर सफारी में ऐसे बाघों को पकड़कर रखने की योजना है जो जंगल से बाहर निकलकर इंसानों पर हमले करने के आदी हो चुके हैं। अभी तक ऐसे बाघों को पकड़कर चिड़ियाघरों में भेजा जाता है। चूंकि सीमित क्षेत्र के कारण चिड़ियाघरों में बहुत ज्यादा बाघों को नहीं रखा जा सकता, इसलिए टाइगर सफारी को बेहतर विकल्प माना जा रहा है। दूसरी ओर, अधिकारियों को यह भी उम्मीद है कि पीलीभीत में प्रदेश का पहला टाइगर सफारी बनने के बाद यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होगी और इससे वन विभाग की कमाई भी बढ़ेगी।
ऐसा होगा टाइगर सफारी
वन संरक्षक वीके सिंह ने बताया कि टाइगर सफारी इंसानों के लिए खतरा बन गए बाघों को पकड़कर प्राकृतिक क्षेत्र में रखने का एकमात्र विकल्प है। टाइगर सफारी के लिए टाइगर रिजर्व से सटे किसी बड़े और ऊंचे भूभाग को घनी तार फेसिंग कर सुरक्षित किया जाएगा और उसी के अंदर बाघों को रखा जाएगा। फेंसिंग के बाहर से पर्यटक इन बाघों की हरकतों को आसानी से देख सकेंगे और उन्हें जंगल में आकर भी बाघ को न देख पाने जैसी निराशा नहीं होगी। पर्यटकों की सुविधा के लिए इसके चारों ओर कॉरिडोर भी बनाया जाएगा जिसमें जगह-जगह पर वाच टॉवर होंगे। बंद गाड़ियों में पर्यटक बाघों के बिल्कुल नजदीक तक जा सकेंगे। पर्यटकों से होने वाली कमाई से ही टाइगर सफारी का खर्च चलाने की योजना है।
बरुआ कुठारा या बगा-56 को माना जा रहा है उपयुक्त जगह
टाइगर सफारी बनाने के लिए बराही रेंज में अवैध कब्जे से मुक्त कराई गई 1400 एकड़ और महोफ रेंज के तीन ओर से उत्तराखंड की सीमा से घिरे बगा-56 कंपार्टमेंट की लगभग 850 एकड़ जमीन को सर्वाधिक उपयुक्त माना जा रहा है। उम्मीद है कि यदि योजना मंजूर हुई तो इन्हीं में से किसी एक स्थान पर टाइगर सफारी बनाया जा सकता है।
टाइगर सफारी बना तो बाघों को सुरक्षित रखने के साथ पर्यटकों को भी आसानी से बाघ देखने का मौका मिल सकेगा। टाइगर सफारी बनने से जिले में पर्यटन और बढ़ेगा। फिलहाल इस पर चर्चा चल रही है। उम्मीद है जल्द प्रदेश में पहला टाइगर सफारी अस्तित्व में आएगा।
- वीके सिंह, वनसंरक्षक