एसजीपीजीआई अग्निकांड में जान गंवाने वाली पीलीभीत निवासी तैयबा के भाई तालिब ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर आरोप लगाते हुए डॉक्टरों पर कार्रवाई की मांग की है। साथ ही मुआवजे की मांग की है। उसका कहना है कि ‘ऑपरेशन थियेटर में आग लगने पर डॉक्टर मेरी बहन तैयबा को टेबल पर ही छोड़कर भाग गए। वे चाहते तो तैयबा की जान बचाई जा सकती थी।
लखनऊ स्थित संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) में सोमवार को ओटी कॉम्प्लेक्स में आग लगने के बाद मंगलवार को भी हालात सामान्य नहीं हो सके। संस्थान ने इंडोक्राइन सर्जरी और सीवीटीएस विभाग के ऑपरेशन के लिए वैकल्पिक ओटी चलाने की बात कही थी। हालांकि, इमरजेंसी को छोड़ अन्य वैकल्पिक ओटी का संचालन नहीं हो सका। इसके अलावा भर्ती दस मरीजों को छुट्टी भी दे दी गई।
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इंडोक्राइन सर्जरी की ओटी में आग लगने से उपकरण जल गए थे। इसके बगल की सीवीटीएस की ओटी भी क्षतिग्रस्त हो गई थी। पूरे ओटी कॉम्प्लेक्स में कुल 13 ऑपेशन थियेटर हैं। धुएं से दीवारें काली हो जाने से इनमें ऑपरेशन करने लायक स्थिति नहीं है।
संस्थान में सोमवार दोपहर 12.40 बजे इंडोक्राइन सर्जरी की ओटी में ऑपरेशन के दौरान मॉनीटर में स्पार्क से आग लग गई थी। उस समय पीलीभीत निवासी तैयबा की सर्जरी चल रही थी। सर्जरी बीच में रोककर महिला को दूसरी जगह शिफ्ट करने की कोशिश की गई, पर उसकी मौत हो गई।
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इसके ठीक बगल में सीवीटीएस की ओटी में गाजीपुर निवासी नेहा के नवजात बच्चे की दिल की सर्जरी चल रही थी। धुआं भरने पर उसे शिफ्ट करने का प्रयास किया गया, लेकिन उसकी भी मौत हो गई थी। उधर, सोनभद्र निवासी वैभव पांडेय के घरवालों ने भी उसकी मौत की वजह आग को बताया था। हालांकि, केजीएमयू प्रशासन ने इसे खारिज कर दिया था।
आग लगी तो बहन को ऑपरेशन टेबल पर छोड़कर भाग गए डॉक्टर
‘ऑपरेशन थियेटर में आग लगने पर डॉक्टर मेरी बहन तैयबा को टेबल पर ही छोड़कर भाग गए। वे चाहते तो तैयबा की जान बचाई जा सकती थी।’ यह आरोप पीलीभीत के मोहल्ला अशरफ खां निवासी तालिब ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर लगाते हुए डॉक्टरों पर कार्रवाई की मांग की है। साथ ही मुआवजे की मांग की है।
लखनऊ के एसजीपीजीआई में सोमवार को हुए दर्दनाक हादसे में पीलीभीत की तैयबा के जान जाने से परिजन आक्रोशित हैं। तालिब का कहना है कि पीजीआई के डॉक्टरों से बहन की जिंदगी मांगी थी, लेकिन उन्होंने मौत दे दी। भाई तालिब ने बताया कि घटना के वक्त वह ऑपरेशन थियेटर के बाहर थे। चार घंटे तक इधर-उधर भटकता रहे।
किसी कर्मचारी ने नहीं बताया कि तैयबा कहां और किस हाल में हैं। अगर पता चल जाता तो वह खुद तैयबा को बाहर निकाल लाते। डॉक्टर व स्टाफ मरीज को असहाय ऑपरेशन टेबल पर मरने के लिए छोड़कर भाग गया।
तालिब ने बताया कि उनके पिता प्लंबर का काम करते हैं। तैयबा पांच भाई बहनों में सबसे छोटी थी। उसके इलाज में ही काफी खर्चा हो चुका है। परिवार के पालन पोषण का अब संकट है। लखनऊ में पोस्टमार्टम कराकर सोमवार रात तीन बजे शव उनके हवाले किया गया। मंगलवार सुबह आठ बजे तैयबा का शव पीलीभीत घर लाया गया। सुबह ही शव को सुपुर्द ए खाक कर दिया गया।
चार घंटे बाद बहन की मौत की सूचना दी
भाई तालिब ने बताया कि तैयबा को पैराथायराइड की बीमारी के कारण 14 दिसंबर को पीजीआई में भर्ती कराया गया था। 18 दिसंबर को ऑपरेशन होना था। उन्हें सुबह नौ बजे ऑपरेशन थियेटर में ले जाया गया था। बकौल तालिब 12:45 बजे ऑपरेशन थियेटर में शार्ट सर्किट से एनेस्थीसिया वाले सिलिंडर में आग लगने से वह फट गया। इसके बाद ऑपरेशन कर रहे डाक्टर व स्टाफ मरीज को छोड़कर बाहर भाग आया। शाम पांच बजे तैयबा की मौत की सूचना दी गई।
दमकलकर्मियों ने तीन घंटे बाद निकाला शव
तालिब ने बताया कि ऑपरेशन थियेटर में आग सोमवार दोपहर करीब 12:45 बजे लगी। आग में जलकर उनकी बहन की मौत हो गई। तीन घंटे से ज्यादा समय बाद अग्निशमन कर्मियों ने शव को करीब 4:30 बजे बाहर निकाला। तालिब ने बताया कि शव इस कदर जल चुका था कि पहचानने तक में नहीं आ रहा था।