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संस्कारों की रक्षा का दायित्व निभाएं साहित्यकार : राम नाईक

Tue, 15 Mar 2016 11:46 PM IST
ब्यूरो पीलीभीत।
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राज्यपाल - फोटो : अमर उजाला
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संस्कार भारती के हिंदी साहित्य सम्मेलन में पहुंचे राज्यपाल, साहित्यकारों को सम्मानित किया
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संस्कारों की रक्षा के लिए साहित्यकारों को अपनी कलम की ताकत का प्रयोग कर समाज को जागरूक करने की जरूरत है। यह उद्गार संस्कार भारती के हिंदी साहित्य सम्मेलन राज्यपाल राम नाईक ने व्यक्त किए। इस मौके पर उन्होंने साहित्यकारों को सम्मानित कर पुस्तकों का विमोचन भी किया।
उपाधि कालेज के निकट बैंकेट हाल में आयोजित सम्मेलन का शुभारंभ राज्यपाल राम नाईक ने दीप जलाकर किया। स्वागत और ध्येयगीत के बाद साहित्यकार नरेंद्र कोहली ने ‘साहित्य का धर्म’ पर चर्चा शुरू की। इसके बाद राज्यपाल ने देश के विभिन्न स्थानों से आए ख्याति प्राप्त साहित्यकारों एवं समाजसेवियों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया और पूनम चंद्रा, जीतेश राज व प्रणव शास्त्री की पुस्तक का विमोचन किया। अपने संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि पीलीभीत जनपद में साहित्य का इतना बड़ा आयोजन इसके उत्थान में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि आज धर्म का अर्थ हिंदू, मुस्लिम, सिख या ईसाई से लगाया जाता है, जबकि धर्म का मतलब वह कर्तव्य है जिसे हमें धारण करना चाहिए। उन्होंने रामायण और राम का उदाहरण देते हुए कहा कि राम ने पिता की आज्ञा पर वनवास जाकर पुत्र धर्म निभाया जबकि लक्ष्मण ने साथ जाकर भाई का धर्म, सीता ने पत्नी और हनुमान ने सेवा धर्म निभाया। इसी प्रकार अंत में राम ने राजा का धर्म निभाकर अपना आदर्श प्रस्तुत किया। इस हमें भी अपने जीवन धर्म को निभाना चाहिए। उन्होंने कहा साहित्य का निर्माण भाषा के आधार पर होता है। इसमें हिन्दी का विशेष योगदान है। उन्होंने संस्कार भारती से जुड़े साहित्कारों को अन्य भाषाओं के साहित्य को एक दूसरे की भाषा में अनुवाद कर आगे आने की सलाह भी दी। कार्यक्रम का संचालन आयोजक डॉ. प्रणव शास्त्री और आभार आचार्य देवेंद्र देव ने व्यक्त किया। मंच पर राज्यपाल के साथ साधना मिश्रा, बीसलपुर विधायक रामसरन वर्मा, डॉ. नरेंद्र कोहली, डॉ. आरपी सिंह, डॉ. योगेंद्रनाथ मिश्रा, बाबा योगेंद्र भी मौजूद रहे।
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‘अभिव्यक्ति की आजादी के साथ मर्यादा जरूरी’
राज्यपाल ने यूपी सरकार के काम पर कहा कि जनता सब जानती है
 हिंदी साहित्य सम्मेलन में आए राज्यपाल राम नाईक ने कहा अभिव्यक्ति की आजादी है लेकिन मर्यादा का पालन भी जरूरी है। सरकार के कार्यकाल पर उन्होंने कहा कि जनता को क्या मिला यह जनता ही बता सकती है।
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साहित्य सम्मेलन से वापस जाते समय पत्रकारों से वार्ता में जेएनयू मुद्दे पर उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में पढ़ाई का वातावरण होना चाहिए। यह देश की दशा और दिशा बदलने में अहम हैं लेकिन जिस प्रकार जेएनयू का मामला प्रकाश में आया है वह दुखद है। उन्होंने कहा कि देश में हर किसी को अभिव्यक्ति की आजादी होनी चाहिए, लेकिन इसके लिए मर्यादा भी जरूरी है। प्रदेश सरकार के चार साल के कार्यकाल पर पूछने पर उन्होंने कहा कि मैं पिछले डेढ़ साल से प्रदेश का कामकाज देख रहा हूं। हर सरकार जनता से विकास सहित तमाम वादे करती हैं। इनमें से कुछ पूरे होते हैं और कुछ नहीं हो पाते। जहां तक प्रदेश के चार साल के कार्यकाल के अच्छा या खराब का सवाल है तो मैं राज्यपाल होने के नाते अपने पद की मर्यादा से बंधा होने के कारण कोई टिप्पणी नहीं कर सकता। जनता सब जानती है। मीडिया एवं अन्य माध्यमों से हर बात जनता तक पहुंच रही है। यह कहकर उन्होंने प्रदेश सरकार पर भी कटाक्ष किया। 
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