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Pilibhit: जिस बाघिन के कारण 11 घंटे रही दहशत, उसके मिजाज से हर कोई हैरान, यकीन नहीं है तो ये वीडियो देखें

Tue, 26 Dec 2023 06:23 PM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला नेटवर्क, पीलीभीत

सार

Tigress in Pilibhit: पीलीभीत के अटकोना गांव में बाघिन के कारण करीब 11 घंटे तक दहशत रही, लेकिन उसके स्वभाव ने लोगों को हैरान कर दिया। वह दो इंच चौड़ी दीवार पर घूमती रही। कभी लेटी तो जम्हाई ली, लेकिन किसी पर हमलावर नहीं हुई, जबकि आसपास सैकड़ों की भीड़ जुटी रही। 
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दीवार पर खड़ी बाघिन और उसे देखने को जुटी भीड़ - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पीलीभीत के अटकोना गांव में किसान सुखविंदर सिंह के घर में पहुंची बाघिन के स्वभाव को देख हर कोई हैरान रह गया। बाघिन ने दो इंच चौड़ी और पांच फीट ऊंची दीवार पर ही करीब 11 घंटे बिताए। सैकड़ों की भीड़ के बीच बाघिन दीवार पर ही घूमती रही। चंद कदम की दूरी पर लोग थे लेकिन किसी पर हमला नहीं किया।

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बाघिन 11 घंटे तक दो इंच की दीवार पर ही रही, नीचे नहीं उतरी। इसी दीवार पर कुछेक कदम चली फिर बैठ गई। यहां तक कि जब उसे बेहोश करने के लिए डॉट मारी गई तब भी उसने भागने का प्रयास नहीं किया। तीसरी डॉट लगने पर बेहोश होकर वह दीवार से नीचे गिर पड़ी। 

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रेस्क्यू के दौरान भी बाघिन दहाड़ी नहीं और न ही बचने के लिए इधर उधर भागी। अगर बाघिन एक छलांग भी लगाती तो वहां भगदड़ मच जाती लेकिन उसने ऐसा कुछ नहीं किया। एक आलसी जीव की तरह दीवार पर ही बैठी रही। बताया जा रहा है कि रात में बाघिन एक-दो बार जरूर दहाड़ी, जिससे ग्रामीमों की नींद उड़ गई। 

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ऐसा होता है बाघ-बाघिन का स्वभाव
पीलीभीत टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर नवीन खंडेलवाल ने बताया कि बाघ या बाघिन का स्वभाव ही ऐसा होता है। वह जहां बैठ गया तो बैठ गया। फिर उसे कोई नहीं उठा सकता। चाहे बीच सड़क पर बैठा हो या फिर जंगल में। उन्होंने बताया की बाघिन पूरी तरह से स्वस्थ्य है। वह भूखी नहीं थी। 

उन्होंने बताया कि बाघ सप्ताह में एक बार शिकार करता है व उसे खाता रहता है। चूंकि बाघिन का पेट भरा था इसलिए उसे ज्यादा कोई दिक्कत नहीं थी। चारों तरफ भीड़ देखकर वह दीवार पर ही बैठी रही। वहीं रेस्क्यू करने वाले डॉ. दक्ष गंगवार ने बताया कि बाघ या बाघिन का स्वभाव है कि जब तक निकलने का रास्ता नहीं मिलता जाता नहीं, वहीं बैठा रहेगा। 
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चूंकि वह चारों तरफ से भीड़ से घिरी थी, इसलिए दीवार पर ही बैठी रही। बाघिन डरती नहीं है इसलिए उसने भागने का प्रयास नहीं किया। अगर तेंदुआ होता तो वह बचने के लिए भागता। वन विभाग की टीम ने बाघिन को माला गेस्ट हाउस में रखा है। वहां वह दहाड़ भी रही है। वन अफसरों की मानें तो उसे जल्द ही जंगल में छोड़ दिया जाएगा।
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