ऐसा होता है बाघ-बाघिन का स्वभाव
पीलीभीत टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर नवीन खंडेलवाल ने बताया कि बाघ या बाघिन का स्वभाव ही ऐसा होता है। वह जहां बैठ गया तो बैठ गया। फिर उसे कोई नहीं उठा सकता। चाहे बीच सड़क पर बैठा हो या फिर जंगल में। उन्होंने बताया की बाघिन पूरी तरह से स्वस्थ्य है। वह भूखी नहीं थी।
उन्होंने बताया कि बाघ सप्ताह में एक बार शिकार करता है व उसे खाता रहता है। चूंकि बाघिन का पेट भरा था इसलिए उसे ज्यादा कोई दिक्कत नहीं थी। चारों तरफ भीड़ देखकर वह दीवार पर ही बैठी रही। वहीं रेस्क्यू करने वाले डॉ. दक्ष गंगवार ने बताया कि बाघ या बाघिन का स्वभाव है कि जब तक निकलने का रास्ता नहीं मिलता जाता नहीं, वहीं बैठा रहेगा।
चूंकि वह चारों तरफ से भीड़ से घिरी थी, इसलिए दीवार पर ही बैठी रही। बाघिन डरती नहीं है इसलिए उसने भागने का प्रयास नहीं किया। अगर तेंदुआ होता तो वह बचने के लिए भागता। वन विभाग की टीम ने बाघिन को माला गेस्ट हाउस में रखा है। वहां वह दहाड़ भी रही है। वन अफसरों की मानें तो उसे जल्द ही जंगल में छोड़ दिया जाएगा।