शारदा नदी पिछले सालों में कई गांवों का अस्तित्व मिटा चुकी है। इन गांवों के बेघर लोग शारदा डैम के वर्जित क्षेत्र में अस्थाई रूप से बसते जा रहे हैं। इससे डैम की सुरक्षा को खतरा बढ़ गया है। इसे देखते हुए शारदा सागर खंड ने टीम बनाकर अतिक्रमणकारियों की सूची बनानी शुरू कर दी है।
शारदा नदी कई वर्षों से शारदा डैम के सामने भू-कटान कर तबाही मचाती रही है। इसके चलते इलाके के गांव ढकिया ताल्लुके महाराजपुर, गुन्हान, रमनगरा, बिजौरी खुर्द कलां और भूड़ा गोरखडिब्बी की आबादी सहित सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि नदी में समा चुकी है। यहां क्षेत्रीय लोगों के अलावा सिखों ने भी कारसेवा कर बचाव कार्य किए, लेकिन सब नदी के भेंट चढ़ गया था। इसके बाद इन गांवों के लोग शारदा डैम के वर्जित क्षेत्र में अस्थाई झोपड़ियां डालकर काबिज हो गए थे। इन्हें बाद में प्रशासन ने कहीं अन्यत्र नहीं बसाया। नतीजा यह निकला कि उनकी आड़ में बाहर से सैकड़ों अपंजीकृत बंगाली भी काबिज हो गए। अब स्थिति यह है कि अस्थाई झोपड़ियों के स्थान पर पक्के भवन बनने लगे हैं।
इधर नदी ने इन गांवों में कृषि भूमि के सफाए के बाद कुछ कृषि भूमि का क्षेत्र छोड़ दिया था, लेकिन इस वर्ष नदी ने ऐसी अधिकांश भूमि का पुन: सफाया कर दिया है। अब रमनगरा बुझिया का अस्तित्व भी संकट में है। अभी बरसात के दो माह शेष हैं। ऐसे में नदी बिजौरीखुर्दकलां के जंगल का भी सफाया कर सकती है। सिंचाई विभाग ने शारदा डैम के सामने बाढ़ नियंत्रण कार्य तो कराए, लेकिन रमनगरा बुझिया क्षेत्र में कोई कार्य नहीं कराए गए। जिसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है। इधर, सिंचाई विभाग के आला अफसरों ने जब कटान क्षेत्र का दौरा किया तो शारदा डैम के किनारे बसती जा रही आबादी पर नाराजगी जताई और वर्जित क्षेत्र में बसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बाद शारदा सागर खंड के अभियंताओं ने जीरो से दस किमी तक पांच कर्मचारियों की टीम बनाकर अतिक्रमणकारियों की सूची बनाने के निर्देश दिए हैं। सींचपालों ने सूची बनाने का काम शुरू कर दिया है।