पीलीभीत। जिला क्षय रोग अस्पताल के कागजों में मरीजों का उपचार चकाचक है लेकिन हकीकत में स्थिति बदहाल है। दूर-दराज से अस्पताल पहुंच रहे मरीजों को चिकित्सक का इंतजार करना पड़ रहा है। चिकित्सक उपस्थिति दर्ज कर अस्पताल से परामर्श समय से पहले गायब हो जा रहे हैं। ऐसे में मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। स्टाफ बिना मास्क के ही परामर्श दे रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से क्षय रोगियों के इलाज के लिए समुचित उपचार के दावे सिर्फ कागजी हैं। हकीकत में जिला क्षय रोग अस्पताल में पहुंच रहे मरीजों के इलाज पर संकट मंडरा रहा है। शनिवार को क्षय रोग अस्पताल के उपचार की पड़ताल में चिकित्सक नदारद मिले, जबकि कर्मचारी ही मरीजों को परामर्श देते दिखाई दिए। अस्पताल परिसर में पहुंच रहे कई मरीज तो एक दूसरे से संक्रमण के खतरे को देखते हुए मास्क लगाकर पहुंच रहे थे लेकिन कर्मचारी बिना मास्क के कार्य करते देखे गए। अस्पताल परिसर में कुछ मरीज परामर्श को लेकर चिकित्सक का इंतजार करते देखे गए। हालांकि अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों की स्पुटम जांच और एक्सरे करते हुए कर्मचारी देखे गए।
एमडीआर वार्ड में बरत रहे लापरवाही
टीबी मरीज से एहतियात बरतने की जरूरत होती है। इसके लिए जिला अस्पताल के मेडिसिन वार्ड से कुछ अलग एमडीआर वार्ड बनाया है। इसमें भर्ती मरीजों और पहुंचने वाले तीमारदारों को मास्क लगाना वार्ड के मानकों में है लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही से एमडीआर वार्ड में संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है। शनिवार को भर्ती मरीज वार्ड में बिना मास्क के देखे गए।
कंप्यूटर कक्ष पर ताला, काम ठप
टीबी अस्पताल में शनिवार को दोपहर कंप्यूटर कक्ष में ताला लगा देखा गया। जबकि जिले में मरीजों और उनकी दवा की स्थिति, जांच रिपोर्ट, किट वितरण सहित अन्य महत्वपूर्ण कार्य ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से किए जाते हैं। वहीं कंप्यूटर कक्ष में ताला लगे होने से कुछ मरीज अपनी समस्याओं को लेकर लौटते दिखाई दिए।
क्षय रोग अस्पताल में कर्मचारियों को भी मास्क लगाना चाहिए। चिकित्सक नहीं होने की जानकारी की जाएगी। - डॉ. आलोक कुमार, मुख्य चिकित्साधिकारी।
जिला अस्पताल के एमडीआर वार्ड में बिना मास्क के भर्ती मरीज। संवाद
जिला अस्पताल के एमडीआर वार्ड में बिना मास्क के भर्ती मरीज। संवाद