जिला अस्पताल के रैन बसेरे में पड़े बेड। संवाद
पीलीभीत। ठंड की शुरुआत होते ही जिला अस्पताल में संचालित रैन बसेरे की बदहाल व्यवस्थाएं सामने आने लगी हैं। रैन बसेरे में न तो पर्याप्त बेड हैं और न ही उसमें तीमारदारों के ठहरने की उचित व्यवस्था। मरीजों के साथ आए तीमारदारों को अस्पताल परिसर में इधर-उधर रात गुजारनी पड़ती है। सबसे अधिक समस्या मरीज के साथ रहने वाले तीमारदार को होती है।
जिला अस्पताल की मेडिकल कॉलेज के अधीन होने के बाद भी जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों के साथ आए तीमारदारों के ठहरने की व्यवस्थाएं सुधर नहीं सकी हैं। अब ठंड के दिन करीब आ रहे हैं। जिले का तापमान भी दिन-प्रतिदिन कम हो रहा है। मंगलवार सुबह बारिश और हवा से ठंड का असर भी बढ़ गया। मौसम का मिजाज तो बदल रहा है लेकिन जिला अस्पताल में तीमारदारों के रुकने की व्यवस्था बदहाल होती जा रही है। जिला अस्पताल में मौजूदा समय में 19 बेड का रैन बसेरा संचालित है। इसमें 11 बेड महिला, आठ बेड पुरुष तीमारदारों के लिए डाले गए हैं। रैन बसेरे में लगभग 20 बेड कम हैं। मंगलवार की दोपहर रैन बसेरे में काफी अव्यवस्थाएं नजर आईं। किसी बेड पर तकिया तो कहीं कंबल आदि की व्यवस्था नहीं दिखी। रैन बसेरे के शौचालय में नियमित सफाई भी नहीं होती है।
रसोईघर में ताला, सुरक्षाकर्मी को बनाया केयरटेक
रैन बसेरे में मरीज के दूध व खाने-पीने की वस्तुओं को गर्म करने के लिए रसोईघर भी बना है। मगर कर्मियों के अभाव में रसोईघर में ताला पड़ा है। तीमारदारों को मजबूरन जिला अस्पताल के बाहर स्थित कैंटीन का सहारा लेना पड़ता है। सुरक्षाकर्मी को ही रैन बसेरे का केयरटेकर बना रखा है जो तीमारदारों के ठहरने का विवरण दर्ज करता है।
जिला अस्पताल के रैन बसेरे में कुछ बेड कम है। जो भी व्यवस्थाएं अधूरी हैं, उनको जल्द पूरा कर लिया जाएगा।
डॉ. रमाकांत सागर, अधीक्षक जिला अस्पताल
जिला अस्पताल के रैन बसेरे में पड़े बेड। संवाद
जिला अस्पताल के रैन बसेरे में पड़े बेड। संवाद