पीलीभीत। परिषदीय विद्यालयों के बच्चों को यूनिफॉर्म, जूता-मोजा और स्वेटर के लिए शासन से धनराशि सीधे अभिभावकों के खातों में भेजी जाती है ताकि बच्चों को सुविधा मिल सके। जमीनी स्तर पर यह व्यवस्था कई जगहों पर लापरवाही और हीलाहवाली की भेंट चढ़ रही है। इसका सीधा असर उन जरूरतमंद परिवारों के बच्चों पर पड़ रहा है जिनके लिए समय पर ड्रेस और स्वेटर उपलब्ध होना अत्यंत जरूरी है। ठंड बढ़ने के बावजूद अनेक छात्र बिना स्वेटर और पुराने कपड़ों में स्कूल आने को मजबूर हैं। कई अभिभावक खाते में आई धनराशि का उपयोग अन्य जगहों पर कर देते हैं। इसके चलते बच्चे लाभ से वंचित रह जाते हैं। अधिकारियों के दावों और वास्तविक स्थिति में बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है।
धनराशि न आने से बिना स्वेटर स्कूल आ रहे बच्चे
जहानाबाद। कस्बे के मोहल्ला बाजार कटरा स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय में अभी सभी बच्चों को यूनिफॉर्म, जूता-मोजा और स्वेटर की धनराशि नहीं मिली है। स्कूल की प्रधानाध्यापिका सीमा जीवी ने बताया कि स्कूल में कुल 105 छात्र–छात्राएं पंजीकृत हैं। इनमें 43 बालक और 62 बालिकाएं शामिल हैं। 70 बच्चों के खातों में राशि पहुंच चुकी है, जबकि 35 बच्चों की धनराशि अब तक लंबित है। स्कूल में कई छात्र बिना ड्रेस, बिना जूते-मोजे और बिना स्वेटर के दिखे। प्रधानाध्यापिका के अनुसार कुछ मामलों में अभिभावक धनराशि निकालकर अन्य आवश्यकताओं में खर्च कर लेते हैं। इसके चलते भी बच्चे पुरानी ड्रेस में ही स्कूल आते हैं।
कोई बिना स्वेटर तो कोई पुरानी यूनिफार्म में पहुंच रहा स्कूल
न्यूरिया। कंपोजिट विद्यालय न्यूरिया में कुल 178 छात्र पंजीकृत हैं। विद्यालय प्रबंधन ने दावा किया कि सभी बच्चों के अभिभावकों के खातों में स्वेटर और अन्य मदों की पूरी धनराशि भेज दी है, लेकिन बृहस्पतिवार को स्कूल में मौजूद बच्चों में कई बिना स्वेटर के दिखाई दिए तो कई पुरानी यूनीफार्म में ही स्कूल पहुंचे। पूछने पर बच्चे कुछ बोलने से कतराते रहे। स्टाफ का कहना है कि अभिभावकों को धनराशि का सही इस्तेमाल करने के लिए जागरूक भी किया जा रहा है।
करीब सात हजार बच्चे अब भी वंचित
जिले में संचालित 1499 परिषदीय स्कूलों में 1.62 लाख बच्चे पंजीकृत हैं। शासन ने अभिभावकों के खाते में 1200 रुपये भेजने की प्रक्रिया अमल में लाई। इस धनराशि में छह सौ रुपये में दो जोड़ी यूनीफार्म के अलावा 175 रुपये स्कूल बैग के लिए, 125 रुपये जूते-मोजे और 200 रुपये स्वेटर के लिए और 100 रुपये स्टेशनरी के लिए दिए जाते हैं। विभागीय आकड़ों के अनुसार इस शैक्षिक सत्र में अब तक 1.54 लाख छात्र-छात्राओं के अभिभावकों के खातों में धनराशि जा चुकी है। करीब सात हजार बच्चे अभी शेष हैं।
शासन की ओर से भेजी गई यूनिफॉर्म, जूता-मोजा और स्वेटर मद की धनराशि की वर्तमान स्थिति की जानकारी की जाएगी। इसके बाद सुधार की दिशा में प्रयास तेज किए जाएंगे। साथ ही अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों को ठंड से बचाव के लिए स्वेटर और ड्रेस के लिए प्राप्त धनराशि का सही उपयोग करें।- रोशनी सिंह, बीएसए