पीलीभीत। बीते साल की बाढ़ के छोड़े निशान आज भी जिंदा हैं। कलीनगर, माधोटांडा, अमरिया, बरखेड़ा और दियोरिया क्षेत्र की सड़कें अब भी बाढ़ के जख्म ढो रही हैं। कभी जीवन का रास्ता रहीं ये सड़कें अब खतरों का सफर बन चुकी हैं। डगा और कलीनगर जैसे प्रमुख पुल दरारों की वजह से बंद हैं। इससे आधे जिले की रफ्तार थम सी गई है। महीनों से सर्वे और प्रस्तावों की बातें हो रही हैं लेकिन सुधार की कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है। लोग हर दिन उम्मीद और डर के बीच सफर कर रहे हैं। अब गन्ना सीजन के साथ पर्यटन सत्र भी एक नवंबर से शुरू हो रहा है। ऐसे में लोगों की दिक्कत और बढ़ जाएगी।
जिले में पिछले वर्ष आई बाढ़ ने कई मार्गों पर स्थित पुलियों को क्षतिग्रस्त कर दिया था। सबसे अधिक असर कलीनगर क्षेत्र के माधोटांडा–पीलीभीत मार्ग पर पड़ा था। यहां चार स्थानों पर पुलिया पूरी तरह कट गई थीं। तत्कालीन स्थिति में विभाग ने अस्थायी मरम्मत कर आवागमन शुरू तो कराया लेकिन यह व्यवस्था अब तक स्थायी समाधान का रूप नहीं ले सकी। अमरिया क्षेत्र के भगा मोहम्मदगंज पुल की स्थिति भी काफी खराब है। बाढ़ के समय पुल का संपर्क मार्ग कट जाने से यातायात ठप हो गया था। एक वर्ष बाद भी मरम्मत न होने से हजारों की आबादी को लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है। इसके अलावा बीसलपुर, बरखेड़ा, दियोरिया क्षेत्र में भी रास्ते और पुलिया कटी पड़ी हैं। अब तक कोई सुधार नहीं हो सका है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़कों पुलियों की मरम्मत नहीं होने से लोग जोखिम भरे रास्तों से गुजरने के लिए मजबूर हैं और विभाग की कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।
भंगा मोहम्मदगंज मार्ग की कटी एप्रोच बनी मुसीबत, कई गांवों के लोग परेशान
बरेली–हरिद्वार नेशनल हाईवे से भिकारीपुर को जोड़ने वाले भंगा मोहम्मदगंज मार्ग की एप्रोच और सड़क पिछले वर्ष बाढ़ के पानी में कट गई थी। एक साल बीत जाने के बाद भी मरम्मत के प्रयास शुरू नहीं हो सके। भंगा मोहम्मदगंज पुल से प्रतिदिन सैकड़ों लोगों का तहसील मुख्यालय अमरिया आना-जाना रहता है लेकिन मार्ग कटने के बाद से क्षेत्र की कई ग्राम पंचायतों का तहसील मुख्यालय से संपर्क टूट गया है। ग्रामीणों को करीब 25 किलोमीटर का अतिरिक्त सफर तय करना पड़ रहा है। स्कूल जाने वाले बच्चों, मरीजों और किसानों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। -
दरारों से जर्जर कलीनगर और डगा पुल आठ माह से बंद
100 साल की मियाद पूरी कर चुके कलीनगर और डगा पुलों पर दरारें पड़ने के बाद पिछले आठ माह से आवागमन पूरी तरह बंद है। मरम्मत का प्रस्ताव अब तक फाइलों में अटका हुआ है। पुलों के बंद होने से क्षेत्र की करीब दो लाख की आबादी बुरी तरह प्रभावित है। जनपद मुख्यालय और उत्तराखंड से सीधा संपर्क टूट जाने के कारण लोग खुद को अलग-थलग महसूस कर रहे हैं। अब एक नवंबर से पर्यटन सत्र शुरू होने जा रहा है। ऐसे में सैलानियों को भी डगा और कलीनगर पुल पर आवागमन बंद होने से परेशानी झेलनी पड़ेगी। पुलों पर ग्रिल लगाकर दीवारें खड़ी कर दी गई हैं ताकि कोई व्यक्ति खतरे के बीच न गुजर सके।
दियोरिया-घुंघचाई मार्ग कटा
- बरसात के दौरान दियोरिया-घुंघचाई मार्ग भी कट गया था। इसके बाद इस मार्ग पर आवागमन बंद है। दोपहिया वाहन सवार लंबी दूरी से बचने के लिए जोखिम के बीच कटे मार्ग से होकर ही गुजरने के लिए मजबूर हैं लेकिन लंबा समय बीतने के बाद भी अब तक सुधार के प्रयास शुरू नहीं हो सके हैं।
पूरनपुर-खटीमा मार्ग पर डगा पुल पर लंबे समय से बंद है आवागमन। संवाद
पूरनपुर-खटीमा मार्ग पर डगा पुल पर लंबे समय से बंद है आवागमन। संवाद