पीलीभीत। परिवहन विभाग का सुरक्षित और सुविधाजनक सफर का दावा खोखला है। पीलीभीत डिपो की अधिकतर बसों की खिड़कियों के लॉक गायब हैं। सर्द हवा से यात्री ठिठुर कर यात्रा करने के लिए मजबूर हैं। कई बसों में वाइपर गायब हैं। चालक सीट के पास फैला तारों का मकड़जाल सफर को खतरनाक बना रहा है। प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स और अन्य सुरक्षा इंतजाम भी कागजों पर ही चकाचक हैं। शुक्रवार दोपहर की गई पड़ताल में डिपो की अधिकतर बसों में यात्री सुविधाएं और सुरक्षा इंतजाम भगवान भरोसे नजर आए।
मुख्य शीशे का वाइपर ही गायब मिला
सुबह करीब 11.30 बजे रोडवेज डिपो के बाहर बिजली घर कार्यालय के पास एक बस खड़ी थी। चालक के ठीक सामने वाले शीशे का वाइपर गायब था। ऐसे में साफ तौर से अंदाजा लगाया जा सकता है। रात के समय कोहरा गिरने पर शीशे पर आने वाले पानी को किस तरह से हटाया जाता है। ऐसे में हादसे का खतरा भी रहता है। बताया गया कि बस का संचालन जिले में स्थानीय मार्गों पर होता है।
खिड़कियों से लॉक गायब, अन्य कई शीशे भी जाम
डिपो के बाहर खड़ी पीलीभीत डिपो की बस में चालक साइड वाली अधिकतर खिड़कियों में लॉक ही नहीं दिखा। यह बस बरेली मार्ग पर संचालित होती है। शीशे पूरी तरह बंद नहीं होते। खिड़कियों से घुसती हवा यात्रियों को परेेशान कर रही है। रात के समय ताे समस्या और बढ़ जाती है। कई शीशे जाम की स्थिति में थे। शीशे न पूरी तरह खुलते हैं और न ही बंद होते हैं।
आपातकालीन गेट खुद ही आपात स्थिति में
बसों में सुरक्षा इंतजामों के तहत आपातकालीन गेट लगा होता है। अगर कोई हादसा होता है तो लोग इसका उपयोग कर सकें। बस अड्डे के गेट पर खड़ी बस का आपातकालीन गेट ही खुद ही आपात स्थिति में मिला। गेट को जुगाड़ लगाकर बंद किया था। देखने से लग नहीं रहा था कि हादसे के समय इस गेट को यात्री खोल सकेंगे।
हार्न बजाने के लिए नंगे तारों से अर्थिंग का प्रयोग
डिपो के अंदर खड़ी एक अन्य बस की पड़ताल की गई। इसमें काफी अव्यवस्थाएं नजर आईं। चालक सीट के पास तारों का मकड़जाल फैला था। हार्न बजाने के लिए एक नंगे तार को चालक की खिड़की से अर्थिंग के लिए लगाया था। यह नंगे तार कभी भी बड़े हादसे को दावत दे सकते हैं।
10 से अधिक बिंदुओं की जांच के बाद भेजी जाती है बस
बसों को मार्ग पर भेेजने से पूर्व उनकी व्यवस्थाओं की जांच की जाती है। एआरएम और अन्य जिम्मेदार 10 से अधिक बिंदुओं पर इसकी पड़ताल कर निर्धारित प्रोफार्मा पर विवरण दर्ज करते हैं। व्यवस्थाएं दुरुस्त होने पर ही बसों का संचालन किया जाता है।
बसों की कमी के बारे में गंतव्य पर जाने वाले चालकों की ओर से अवगत कराया जाता है। इसके बाद इनकी मरम्मत कराई जाती है। अगर कुछ बसों में ऐसा है तो इसे दिखवाकर इनकी मरम्मत कराई जाएगी।- विपुल पाराशर, एआरएम।
चालक सीट के पास फैला तारों का मकड़जाल। संवाद
चालक सीट के पास फैला तारों का मकड़जाल। संवाद
चालक सीट के पास फैला तारों का मकड़जाल। संवाद