जंगल सीमा पर एंटी स्नेयर वॉक करते वनकर्मी। स्रोत विभाग
पीलीभीत। तेंदुए के फंदे में फंसने की दो घटनाओं के बाद वन विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है। संभावित खतरे को देखते हुए पीटीआर में एंटी स्नेयर वॉक अभियान चलाया। इस दौरान वन कर्मियों की टीम जंगल के कई इलाकों में जाकर तार, फंदे और अवैध जालों की तलाश करने में जुटी हैं।
पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बाघ, तेंदुए के अलावा अन्य वन्यजीवों की संख्या भी बेहतर है। अधिक संख्या होने के चलते वन्यजीवों को जंगल से बाहर निकलने का सिलसिला भी बना रहता है। शिकारी इसका फायदा उठाने के लिए सक्रिय हो जाते हैं। पीटीआर से सटे इलाकों में एक माह में शिकार से जुड़ी दो घटनाएं सामने आ चुकी हैं। एक माह पूर्व बराही रेंज के नगरिया क्षेत्र में जंगल से बाहर एक तेंदुआ शिकारियों की ओर से लगाए गए फंदे में फंस गया था। उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई थी। इसके अलावा एक सप्ताह पूर्व सुनगढ़ी क्षेत्र के अंतर्गत एक गांव की सीमा में गन्ने के खेत में पहुंचा तेंदुआ भी फंदे में फंस गया था। वन विभाग ने रेस्क्यू करने के 36 घंटे बाद पीटीआर के जंगल में ही छोड़ दिया था। दोनों घटनाओं में शिकारियों की सक्रियता की बात सामने आई थी।
इसके बाद विभागीय अधिकारी गंभीर हुए। जंगल और उससे सटे इलाकों में निगरानी बढ़ाने के साथ ही एंटी स्नेयर वॉक अभियान शुरू किया है। अभियान का उद्देश्य शिकारियों की ओर से लगाए गए फंदों को ढूंढ़कर हटाना और वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। डीएफओ मनीष सिंह का कहना है कि हाल ही में दो अलग-अलग स्थानों पर तेंदुए के फंदे में फंसने की घटनाएं हुई थीं। इसके बाद विभाग ने पूरे क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी है। टीम को ग्रामीणों से भी सतर्क रहने और संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी तुरंत देने के निर्देश दिए हैं।