आयुर्वेदिक कॉलेज में मरीज को देखते चिकित्सक। संवाद
पीलीभीत। गर्मी में एलोपैथिक दवाओं से परहेज रखने वाले मरीज तापमान बढ़ने से आयुर्वेदिक दवाओं की ओर रुख कर रहे हैं। जिससे आयुर्वेदिक कॉलेज में मरीजों की ओपीडी दो माह की अपेक्षा बढ़ गई है। सबसे ज्यादा मरीज वायरल बुखार के साथ दूषित पानी पीने के चलते टाइफाइड संक्रमण के बुखार से ग्रस्त देखे जा रहे हैं। चिकित्सक भी मरीजों को पानी से लेकर खानपान में बदलाव की सलाह दे रहे हैं।
जोड़ों का पुराना दर्द, खराब पाचन तंत्र, एसिडिटी, गैस आदि के पुराने मरीज, जो एलोपैथिक दवाओं से बीमारी पर नियंत्रण रखते हैं, वे गर्मी के मौसम में एलोपैथिक दवाओं के दुष्प्रभाव के चलते परहेज रख रहे हैं। जिसके चलते इन दिनों आयुर्वेदिक चिकित्सालय में पुरानी समस्याओं से जूझ रहे मरीजों की ओपीडी बढ़ गई है। ज्यादातर मरीज जोड़ों का दर्द, खराब खानपान से लिवर इंफेक्शन, पथरी आदि के दर्द के लिए पहुंच रहे हैं। परामर्श के साथ चिकित्सक वटी, चूर्ण, क्वाथ आदि दवाएं दे रहे हैं। सोमवार को भी आयुर्वेदिक कॉलेज में 450 से भी ज्यादा मरीजों की ओपीडी रही। इनमें टाइफाइड, खांसी-जुकाम, कब्ज की समस्या से जूझ रहे सबसे ज्यादा मरीज देखे गए। आयुर्वेदिक कॉलेज के स्वस्थ वृत्त विभाग के चिकित्सक डॉ. सुरजीत ने बताया इन दिनों उनके द्वारा गर्मी में दूषित पानी पीने के कारण टाइफाइड के मरीज सर्वाधिक देखे गए हैं सौ में से 80 मरीज नियमित टाइफाइड से ग्रस्त देखे जाते हैं। जिनको लगातार पानी का उबाल के पानी पीने की सलाह दी जा रही है।
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गर्मी में बढ़ी आयुर्वेदिक कॉलेज की ओपीडी
गर्मी के मौसम ने तेजी पकड़ी, जिससे आयुर्वेदिक कॉलेज में मरीजों की ओपीडी बढ़ गई। फरवरी माह में जहां 8500 मरीजों को परामर्श मिला वहीं मार्च में बढ़कर संख्या 9 हजार हो गई। अप्रैल में तेज गर्मी में सीधे दो हजार मरीजों को इजाफा हुआ जिससे अप्रैल के माह में कुल ओपीडी 11000 पहुंच गई।