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पासपोर्ट के लिए दफ्तर में ही बैठकर लगा दी जाती है सत्यापन रिपोर्ट

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पीलीभीत। विदेश भेजने के लिए सबसे अहम समझे जाने वाले पासपोर्ट के सत्यापन को लेकर भले ही अफसर आए दिन होने वाली बैठकों में मातहतों को संजीदगी का पाठ पढ़ाते हैं, मगर थाना और एलआईयू के स्तर पर इसमें बेहद लापरवाही भरा रवैया अपनाया जाता है। एलआईयू इंस्पेक्टर से लेकर सिपाही और कर्मचारी पासपोर्ट के आवेदन में लगे प्रपत्रों का सत्यापन मौके पर जाकर नहीं करते, बल्कि आवेदक से सेवा पानी लेने के बाद दफ्तर या घर में बैठकर ही रिपोर्ट लगा देते हैं। पुलिस और एलआईयू की इस लापरवाही से किसी आतंकी तक का पासपोर्ट आसानी से बन सकता है।
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देश के आम नागरिक को सामान्य प्रक्रिया से अपना पासपोर्ट बनवाने में पसीने छूट जाते हैं। उसके घर की जांच करने से लेकर तमाम औपचारिकताएं पूरी करने के लिए थाना स्तर और एलआईयू कर्मचारी आवेदक को महीनों अपने दफ्तर के चक्कर लगवा देते हें। उसके बाद भी अगर किसी आवेदक का पासपोर्ट बन जाए तो वह उनका शुक्रिया अदा करते नहीं थकता। मगर, यही काम जालसाज बहुत आसानी से करा लेते हैं। बस, उन्हें इसके लिए एलआईयू और थाना स्तर पर कर्मचारियों का सेवा पानी करना होता है। फिर न तो उनके पासपोर्ट के प्रपत्रों का मौके पर जाकर सत्यापन किया जाता है, न ही बहुत ज्यादा जांच पड़ताल होती है। दफ्तर में ही बैठकर जांच रिपोर्ट लग जाती है। थाने और एलआईयू में हर एक चीज की कीमत तय हैं। फिर चाहे आवेदक का नाम कुछ हो और फोटो किसी दूसरे का भी लगा हो तो भी चलेगा। हाल ही में फर्जी पासपोर्ट का एक बड़ा मामला सामने आ चुका है।
केस एक-
गजरौला में एक प्रेमी ने अपनी प्रेमिका के पति का नाम पता, आधार कार्ड व अन्य कागज का इस्तेमाल करके पासपोर्ट बनवा लिया। उस पर फोटो बस खुद का अपना था। वह आस्ट्रेलिया भी होकर आ गया। जरूरत पड़ने पर जब प्रेमिका का पति अपना पासपोर्ट बनवाने पहुंचा तो पता लगा कि उसके नाम पर तो पहले से पासपोर्ट बना हुआ है। इस मामले की जांच अभी चल रही है।
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केस दो-
तीन साल पहले पूरनपुर क्षेत्र के पते पर दो फर्जी पासपोर्ट बन गए थे। उस दौरान किए गए आवेदन पत्र में सुरजीत नामक व्यक्ति ने खुद को पूरनपुर कोतवाली क्षेत्र के शेरपुर मकरंद गांव का निवासी दर्शाया था, जबकि उस गांव में इस नाम का कोई व्यक्ति नहीं रहता था।
केस तीन-
कुछ वर्ष पहले पूरनपुर के मोहल्ला गनेशगंज मोहल्ले के निवासी बताए गए परमजीत सिंह के पासपोर्ट में पुलिस की रिपोर्ट से लेकर तहसील प्रशासन की रिपोर्ट में गनेशगंज का पता दर्शाते हुए कई प्रमाण पत्र जारी किए गए थे। शिकायत के बाद पड़ताल हुई तो पता गलत ही पाया गया था।
पूरनपुर के नाम पते पर बने थे दो फर्जी पासपोर्ट
पूरनपुर कोतवाली में वर्ष 2016 में स्थानीय नाम पते पर दो फर्जी पासपोर्ट बने थे। एक पासपोर्ट धारक का नाम परमजीत और दूसरे का सुरजीत बताया गया। इनके नाम से निवास प्रमाण पत्र भी तहसील से फर्जी बना था। वह पासपोर्ट के आवेदन में लगाया गया था। सुरजीत की एक फर्जी मार्कशीट माधोटांडा के एक प्राइमरी स्कूल से बनवाकर लगवाई गई थी। तत्कालीन एचसीपी रणवीर सिंह को इस मामले में निलंबित कर दिया गया था। दो लोगों पर एफआईआर भी दर्ज हुई थी। तहसीलदार का तबादला हो गया था।
कई पुलिस कर्मियों पर लटकी कार्रवाई की तलवार
गजरौला में किसान पति के नाम पते पर उसकी पत्नी के प्रेमी का पासपोर्ट बनने के मामले में भी पुलिस और एलआईयू ने कई स्तरों पर जांच की खानापूरी की। मगर, फिर भी उस पासपोर्ट पर फोटो प्रेमिका के पति का लगा मिला। इसकी जांच अभी चल रही है। इस पासपोर्ट को बनाने के लिए अपनी रिपोर्ट लगाने वाले कर्मचारियों की धड़कनें भी इन दिनों बढ़ी हुई हैं। एसपी भी इसमें छानबीन करा रहे हैं। इसमें रिपोर्ट लगाने वाले पुलिस और एलआईयू कर्मियों पर कार्रवाई तय मानी जा रही है।
यह है पासपोर्ट बनवाने की प्रक्रिया
पासपोर्ट बनवाने के लिए पहले ऑनलाइन आवेदन करना होता है। इसके बाद बरेली पासपोर्ट कार्यालय में आवेदक को बुलाया जाता है। वहां आवेदक के मूल प्रपत्रों की जांच होती है। उसके बाद वह प्रपत्र ऑनलाइन एलआईयू और संबधित थाने को भेज दिए जाते हैं। फिर थाना पुलिस और एलआईयू अपने स्तर पर आवेदन में लगे प्रपत्रों की जांच पड़ताल कर रिपोर्ट लगाते हैं। फिर वह आवेदन दोबारा पासपोर्ट कार्यालय भेजा जाता है। तब पासपोर्ट बनकर तैयार होता है।
पासपोर्ट मामले में गजरौला थाने में एफआईआर दर्ज है। मामले की जांच कराई जा रही है। पासपोर्ट में किस-किस ने अपनी रिपोर्ट लगाई थी। इसके बारे में भी पता कराया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद इस मामले में जो भी दोषी निकलेगा, उस पर कार्रवाई की जाएगी। - जयप्रकाश एसपी
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