पीलीभीत/अमरिया। अमरिया क्षेत्र में चल रहे ऑपरेशन तेंदुआ में वनकर्मियों को तो सफलता नहीं मिली, मगर क्षेत्र में लगातार चहलकदमी करने वाले तेंदुए को किसानों ने गन्ने के खेत में घेर लिया। सूचना पर वनकर्मी मौके पर पहुंचे, मगर वनकर्मियों की संख्या मात्र तीन होने पर किसान उनसे गुस्सा हो गए। उनकी वन कर्मियों से नोकझोंक भी हुई। इसी दौरान तेंदुआ बचकर खेत से भाग निकला। वहीं मामला शांत होने पर किसान अपने घरों को चले गए।
पिछले तीन माह से क्षेत्र में आतंक का पर्याय बने तेंदुए को पकड़ने के लिए वन विभाग ने 25 अगस्त से ऑपरेशन तेंदुआ चला रखा है। हालांकि जब से इस अभियान की शुरूआत हुई तो तब से तेंदुआ पालतू पशुओं पर लगातार हमले कर उन्हें अपना निवाला बना रहा है। वन विभाग ने तेंदुए को पकड़ने के लिए चार पिंजरे भी अलग-अलग क्षेत्रों में लगा रखे हैं। मगर, तेंदुआ हत्थे नहीं लगा। इधर, तेंदुए ने रात दो बजे से लेकर चार बजे के बीच अमरिया तहसील के गांव मूसाकोनी निवासी जरनैल सिंह, करनैल सिंह और जोरा सिंह ने घरों में घुसने की, मगर किसानों द्वारा शोर-शराबा करने पर वह भाग गया। शनिवार सुबह सात बजे तेंदुआ मोहनपुर गांव के आसपास देखा गया।
तेंदुआ देख किसानों की घिग्गी बंधी, गन्ने के खेत में घेरा
गांव कटमटा के प्रधान सुखदेव सिंह के भाई केवल सिंह और भतीजा जसपाल सिंह शनिवार दोपहर करीब दो बजे खेत की ओर जा रहे थे। तभी उनकी निगाह सड़क किनारे घूम रहे तेंदुए पर पड़ी। तेंदुआ देख दोनों बुरी तरह घबरा गए। कुछ देर के लिए तो उनकी घिग्घी बंध गई। दोनों ने गांव जाकर तेंदुआ खेत में होने की जानकारी दी। आनन फानन में कई किसान मौके पर जा पहुंचे और गन्ने के खेत की घेराबंदी कर डाली। किसानों का कहना था कि तेंदुआ इसी गन्ने के खेत में छिपा बैठा है। बाद में किसानों ने इसकी सूचना वनकर्मियों को दी।
सक्षम अधिकारी के न पहुंचने से किसान गुस्साए
सूचना मिलते ही वन रक्षक शैलेंद्र सिंह, टाइगर ट्रैकर चेतन और राजीव के साथ मौके पर पहुंचे। मात्र तीन वनकर्मियों के मौके पर पहुंचने से किसान आक्रोशित हो उठे। उनका कहना था कि वन विभाग अभियान के नाम पर खानापूरी कर रहा है। सूचना देने पर चंद कर्मचारियों को भेजा गया। किसानों और वनकर्मियों के बीच इसे लेकर नोकझोंक भी हो गई। इसी दौरान तेंदुआ बचकर भाग निकला। हालांकि बाद में वनकर्मियों ने पगमार्क ट्रेस करके वहां तेंदुआ आने की पुष्टि की। वनकर्मियों द्वारा समझाने पर किसान वापस चले गए।
तेंदुए को पकड़ने के लिए किसानों से बात करने के बाद ही उपयुक्त स्थानों पर पिंजरे लगाए गए हैं। तेंदुआ लगातार चहलकदमी कर रहा है। जहां से भी जानकारी मिलती है, वनकर्मियों को वहां भेजा जाता है। - संजीव कुमार, डीएफओ, वन एवं वन्यजीव प्रभाग