पीलीभीत। गांवों की प्राचीन धरोहरों का संरक्षण अब पंचायती राज विभाग करेगा। विभाग ने इनका विवरण जुटाना भी शुरू कर दिया है। इसे पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। जिले के 1433 राजस्व गांवों की धरोहरों का विवरण एकत्र किया जाना है।
शासन ने गांवों की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने के उद्देश्य से मेरा गांव-मेरी धरोहर योजना शुरू की है। लोग अपनी लोक संस्कृति, गांव, माटी, मेला और स्थलों को बेहतर ढंग से जान सकें। योजना के तहत जिले के सभी राजस्व गांवों के प्राचीन मंदिरों, लोककला, पारंपरिक खेती पद्धति और स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े स्थलों, मेलों समेत अन्य विरासतों का दस्तावेजीकरण किया जा रहा है।
जनपद में पंचायती राज विभाग के माध्यम से इसका क्रियान्वयन किया जा रहा है। ग्राम पंचायत स्तर पर सर्वे कर प्रमुख धरोहरों का विवरण एकत्र किया जा रहा है। साथ ही सत्यापन करने के बाद इन जानकारियों को पोर्टल पर अपलोड किया जा रहा है।
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जिले की 1433 गांवों में 844 का डाटा हुआ अपलोड
जिले में करीब 1433 राजस्व गांव हैं। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक 844 गांवों का डाटा विभागीय पोर्टल पर अपलोड किया जा चुका है। करीब 589 ग्राम सभाओं में भी इनका डाटा एकत्र किया जा रहा है। इसके बाद इन्हें विभागीय पोर्टल पर अपलोड कर दिया जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक डिजिटल दस्तावेजीकरण के माध्यम से न केवल गांवों की पहचान बढ़ेगी, बल्कि संरक्षण और सुंदरीकरण के प्रयासों को भी गति मिल सकेगी।
वर्जन
योजना के तहत जनपद के राजस्व गांवों की विस्तृत प्रोफाइल तैयार कर उन्हें पोर्टल पर अपलोड किया जा रहा है। अब तक करीब 844 गांवों को डाटा पोर्टल पर अपलोड किया जा चुका है। शेष गांवों का डाटा भी जल्द अपलोड कर दिया जाएगा।- रोहित भारती, जिला पंचायती राज अधिकारी।