बाघ से बचाओ वर्ना नहीं डालेंगे वोट
टाइगर रिजर्व से सटे इलाकों में आए दिन हो रही बाघ के हमलों से डरे लोगों ने सुरक्षा के इंतजाम करने की मांग करते हुए विधानसभा चुनाव में मतदान न करने का एलान कर दिया है। बुधवार को पिपरिया संतोष समेत कई गांवों के लोगों ने ‘किसान सुरक्षित नहीं तो वोट नहीं’ नारा लगाते हुए पूरे गांव में जुलूस निकाला। माधोटांडा क्षेत्र के गांव पिपरिया संतोष गांव में दो दिन पहले गांव में ही रहने वाले 17 वर्षीय राजीव को बाघ ने हमला कर मार डाला था। पिछले डेढ़ महीने में बाघ इसी तरह तीन लोगों की जान ले चुका है। वन विभाग की ओर से न ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए कोई इंतजाम किया गया है, न ही बाघ को पकड़ने की कोशिश की जा रही है। इससे ग्रामीणों में दहशत के साथ गुस्सा भी है। मंगलवार को पिपरिया संतोष के अलावा गौटियां, सुखदासपुर, डगा आदि के ग्रामीण एकत्र हुए और उन्होंने बाघ के हमलों से निजात दिलाने को ठोस इंतजाम करने की मांग करते हुए प्रदर्शन किया। इसके बाद ग्रामीणों ने गांव की गलियों में घूमकर नारे लगाते हुए सभी से अपनी सुरक्षा के लिए एकजुट होने का आह्वान किया। ग्रामीणों का कहना है कि बाघ ने एक ही क्षेत्र में तीन लोगों को मार डाला है। यदि यही हाल रहा तो लोग खेतों में जाना छोड़ देंगे और उन्हें भूखों मरना पड़ेगा।
टाइगर प्रोजेक्ट रद्द कराने के लिए भाकपा ने सौंपा ज्ञापन
पूरनपुर। भाकपा (माले) की टीम ने गांव पिपरिया संतोष पहुंचकर बाघ के हमले से मौत के मुंह में समाए गांव निवासी राजीव के परिवार वालों से मिलकर ढाढस बंधवाया। कार्यकर्ताओं ने एसडीएम को तीन सूत्रीय ज्ञापन दिया। ज्ञापन में मृतक के परिजनों को 20 लाख रुपये मुआवजा देने, आदम खोर बाघ को पकड़वाने, पीलीभीत टाइगर प्रोजेक्ट को रद्द कराने की मांग की गई। ज्ञापन देने वालों में भाकपा के वरिष्ठ नेता अलाउद्दीन शास्त्री, जिला सचिव देवाशीष राय, रमाकांती पासवान आदि थे।