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....तो जल्द अमरिया को मिल सकेगी बाघों की दहशत से मुक्ति

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पीलीभीत। मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने को वाइल्ड लाइफ के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) द्वारा शुरू गई कवायद को यदि डब्ल्यूआईआई (वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया) हरी झंडी दे देता है तो जंगल क्षेत्र से बाहर अमरिया क्षेत्र में घूम रहे लगभग एक दर्जन बाघों को दूसरे जंगल में शिफ्ट किया जाएगा। टाइगर रिजर्व प्रशासन ने इस पर गहन मंथन करना शुरू कर दिया है।
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टाइगर रिजर्व में वर्तमान में 65 बाघ मौजूद है। इसके अलावा अमरिया क्षेत्र में भी करीब 12 बाघ पिछले कई वर्ष से डेरा जमाए हुए हैं। अमरिया क्षेत्र में जंगल से बाहर घूम रहे इन बाघों के बारे में बताया जाता है कि वर्ष 2012 में टाइगर रिजर्व से निकलकर एक बाघिन और दो शावक अमरिया क्षेत्र के शुक्ला फॉर्म पहुंचे। आज आठ साल में इनके कुनबे में 12 बाघ हो चुके हैं। इसके चलते अमरिया क्षेत्र में लगातार दहशत कायम है। यह दीगर बात है ये बाघ कभी किसी इंसान पर हमलावर नहीं हुए।
यहां खेतों में चहलकदमी कर रहे बाघों को जंगल की हद में पहुंचाने की कोशिशें औपचारिकताओं की भेंट चढ़ती रही हैं। इसमें भारी भरकम खर्च कर ट्रैंक्यूलाइज एक्सपर्ट से लेकर अन्य विशेषज्ञ लंबे समय तक क्षेत्र में मौजूद रहकर निगरानी में लगे रहे, लेकिन अभियान को सफलता नहीं मिल सकी। वन एवं वन्यजीव प्रभाग लगातार इन बाघों की निगरानी कर रहा है। इसके लिए क्षेत्र में कैमरे भी लगाए गए हैं। इधर प्रदेश के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) सुनील कुमार पांडे ने मानव-वन्यजीवों के बढ़ते संघर्ष को देखते हुए यहां के बाघों को दूसरे जंगलों में शिफ्ट करने को डब्ल्यूआईआई से अनुमति और मदद के लिए पत्र भेजा है। टाइगर रिजर्व प्रशासन के मुताबिक यदि डब्ल्यूआईआई द्वारा अनुमति दे दी जाती है तो अमरिया क्षेत्र में घूम रहे बाघों को शिफ्ट किया जाएगा।
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टाइगर रिजर्व के जंगल में 65 बाघों के अलावा 12 बाघ अमरिया क्षेत्र में प्रवास कर रहे हैं। यदि बाघों की शिफ्टिंग की अनुमति मिल जाती है तो पहले अमरिया क्षेत्र में घूम रहे बाघों को शिफ्ट किया जाएगा। -नवीन खंडेलवाल, डिप्टी डायरेक्टर, टाइगर रिजर्व
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