पीलीभीत। सिटी मजिस्ट्रेट और एसडीएम सदर द्वारा बुधवार रात नगरपालिका के दफ्तर के ताले तुड़वाकर महत्वपूर्ण फाइलें ले जाने के मुद्दे पर शहर विधायक संजय गंगवार और नगरपालिका चेयरमैन विमला जायसवाल के बीच शुरू हुआ वाकयुद्ध दूसरे दिन भी जारी रहा। विधायक ने दूसरे दिन दिए गए अपने बयानों में चेयरमैन पर सीधा निशाना न साधकर नगरपालिका की कार्य प्रणाली पर सवाल उठाए। वहीं चेयरमैन ने बिना लाग लपेट के शहर विधायक पर सीधा हमला बोला। उन्होंने तंज कसते हुए कहा- तीन साल में विधायक ने शहर के अंदर या बाहर एक भी मॉडल रोड बनवाई हो तो उन्हें दिखा दें, फिर नगरपालिका भी उसी तर्ज पर शहर के प्रमुख मार्गों और गलियों की सड़कें बनाएगी।
शहर विधायक संजय सिंह गंगवार ने कहा कि उनका चेयरमैन से कोई मतलब नहीं है। वह चाहते हैं कि शहर की सड़कें बेहतर और गुणवत्तायुक्त बनें। नगरपालिका के काम पारदर्शी और भ्रष्टाचारमुक्त कराए जाएं। अब शहर की जनता तय करे कि उसे हॉटमिक्स प्लांट की बनी मजबूत सड़कें चाहिए या फिर छह महीने में टूट जाने वाली कमजोर सड़कें। नगरपालिका, पीडब्ल्यूडी, जिला पंचायत समेत सभी संस्थाएं अपनी बनाई हुई सड़कों के किनारे बोर्ड लगाकर उस पर संबंधित सड़क की लागत और ठेकेदार का नाम चस्पा करे। यह भी लिखे कि उस सड़क में कितना कोलतार इस्तेमाल हुआ, कितना पत्थर और गिट्टी लगी। सीमेंटेड रोड का एस्टीमेट सार्वजनिक किया जाए। जनता को मीडिया के माध्यम से विकास कार्य बताए जाएं। विधायक ने कहा कि नगरपालिका में आठ-आठ लाख की सड़कों के टेंडर निकले। उसमें केवल तीन ठेकेदारों ने ही टेंडर डाले। वह सब मैनेज्ड थे, एक ने दूसरे को सपोर्ट किया।
डेंगू के मुद्दे पर भी विधायक ने घेरा। बोले-शहर में लोग बीमारी से मर रहे हैं, लेकिन यहां गंदगी और कूड़े तक नहीं हटाए जा रहे। करोड़ों का बजट खर्च होने के बावजूद नाले-नालियां चोक हैं। आखिर, शहर कब साफ होगा। सड़कें कब बनेंगी। विधायक ने कहा कि उनका चेयरमैन से मतलब नहीं है बल्कि यह बात पर नगरपालिका प्रशासन या जो इसके जिम्मेदार हैं, उनसे पूछना चाहते हैं। जनता के हक पर बजट का बंदरबांट और डकैती वह बर्दाश्त नहीं करेंगे। अगर चेयरमैन को धरना-प्रदर्शन करना हो तो करें। मुख्यमंत्री से मिलना चाहती हैं तो वह उनको अपनी गाड़ी में बैठाकर लखनऊ ले जाएंगे। विधायक ने चुनौती दी कि चेयरमैन अपने और अपने पति के कार्यकाल में हुए विकास कार्य की सूची भी ले चलें। वहीं से उनकी जांच भी करा लें। सब कुछ दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।
दूसरी ओर विधायक के बयान पर पलटवार करते हुए चेयरमैन विमला जायसवाल ने कहा कि विधायक अगर कामों में पारदर्शिता चाहते हैं तो अच्छी बात है। नगरपालिका अपने हर काम का प्रस्ताव बनाकर जिलाधिकारी को बनाकर भेजती है। वहीं से उनकी मंजूरी मिलती है। कामों के टेंडर कौन ले रहा है, इससे नगरपालिका को कोई मतलब नहीं। जो सबसे कम रेट लिखता है, उसके टेंडर स्वीकृत किए जाते हैं। 10 लाख से ऊपर के काम ई टेंडरिंग से होते हैं, उससे कम लागत के काम परंपरागत टेंडर प्रक्रिया से कराए जाते हैं। चेयरमैन ने कहा कि संजय गंगवार उन पर विधायक बनने के बाद से अनर्गल दबाव बना रहे हैं। यह बर्दाश्त नहीं होगा। शहर की सफाई व्यवस्था अन्य शहरों की तुलना में बेहतर है। कूड़ा निस्तारण प्लांट जल्द लगवाया जाएगा। डेंगू की समस्या पीलीभीत में ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश और दिल्ली में भी है। विधायक को डेंगू के संबंध में मलेरिया विभाग से पूछना चाहिए। नगरपालिका इसके लिए फॉगिंग कराती है। मैलाथियान दवा टेंडर से ही खरीदी गई। अंत में चेयरमैन ने तंज कसा कि विधायक ने अगर तीन साल में कहीं मॉडल रोड बनाई हो तो उनको चलकर दिखा दें। शहर में नगरपालिका भी उसी तरह की सड़कें बनवाना शुरू कर देगी।
शहर विधायक नगरपालिका पर अनावश्यक कामों का दबाव बनाते हैं। अगर विधायक ने कहीं मॉडल रोड बनाई हो तो वह दिखा दें। हम उसी तरह की सड़कें बनवाना शुरू करा देंगे। -विमला जायसवाल, चेयरमैन नगरपालिका
चेयरमैन को अगर सड़क देखनी है तो ईदगाह, रामलीला वाली रोड, लालपुर चौराहे से सरदार नगर वाली रोड देख लें। मेरी बनाई हुई अन्य सड़कें भी हैं, वह भी हम उनको अपनी गाड़ी से चलकर दिखा देंगे। -संजय गंगवार, विधायक शहर