पीलीभीत। माला के जंगलों में रहकर बूढ़ी हो चुकी गजूरिया बाघिन लखनऊ चिड़ियाघर में पहुंचने के बाद स्वास्थ्य लाभ कर रही है। उम्र अधिक होने की वजह से बाघिन के शिकार करने वाले दोनों दांत घिस चुके हैं। बूढ़ी गजूरिया बाघिन अब अपने दांतों से जानवरों का शिकार नहीं कर पाती। इसलिए चिड़ियाघर में उसे रोजाना बिना हड्डी का आठ किलो मांस भोजन में परोसा जा रहा है। बाघिन को किडनी में समस्या होने के अलावा अन्य बीमारियां भी घेरे हुए हैं। लखनऊ चिड़ियाघर में गजूरिया बाघिन को खुले में दर्शकों के लिए न रखकर अलग से सुरक्षित स्थान पर रखा गया है।
पीलीभीत की माला रेंज के जंगलों में 15 साल उम्र की गजूरिया बाघिन के शिकार करने वाले दांत घिस गए थे। किडनी में समस्या और पर्याप्त भोजन न खाने की वजह से उसके स्वास्थ्य में लगातार गिरावट आ रही थी। पांच साल से बाघिन परेशान थी। दर्द से कराहती बाघिन जब जंगल में नहीं रह पाई तो वह पचपेड़ा के खेतों में आकर अपने दिन काटने लगी। आसपास गांव वाले पहले तो खेतों में बाघिन देखकर दहशत में रहे, लेकिन जब गांव वालों ने वन विभाग की टीम के साथ उसे नजदीक जाकर देखा तो उसकी स्थिति किसी जानवर या इंसान पर हमला करने या शिकार करने की नहीं थी। बाघिन शिकार नहीं कर पाती थी। इसके लिए वह दिन प्रतिदिन कमजोर होने लगी। लगभग एक साल पहले से गजूरिया बाघिन की हालत बिगड़ गई तो वन विभाग ने उसे खेतों से उठाकर लखनऊ चिड़ियाघर भेज दिया। चिड़ियाघर में बाघिन की नियमित दवा चली। उसे बिना हड्डी वाला रोजाना आठ किलो मांस का भोजन दिया जाने लगा। किडनी की बीमारी पर भी डॉक्टरों ने काफी हद तक काबू पा लिया। अब यहां बाघिन लखनऊ चिड़ियाघर में स्वस्थ होने लगी है। वन विभाग के अधिकारियों ने कहा कि स्वस्थ होने के बाद भी गजूरिया बाघिन को माला के जंगल में दोबारा छोड़ने की कोई योजना नहीं है क्योंकि उम्र के लिहाज से बाघिन अब काफी बूढ़ी हो चुकी है। वह पूरी तरह स्वस्थ नहीं हो सकती। बाघिन का बाकी जीवन भी लखनऊ चिड़ियाघर में ही बीतेगा। हालांकि गजूरिया बाघिन ने अपनी उम्र का अधिकांश हिस्सा माला के जंगलों में ही बीताया है।
नर या मादा की औसत उम्र ही 15 साल होती है। गजूरिया बाघिन भी उम्र के इसी पड़ाव पर है। किडनी समेत तमाम बीमारियों ने उसे घेर रखा है। दोनों दांत घिसने से वह चार साल से शिकार नहीं कर पा रही है। लखनऊ चिड़ियाघर में पहुंचने के बाद बाघिन की हालत काफी सुधर गई है। वह रोजाना बिना हड्डी वाला आठ किलो मांस भोजन में ले रही है। चिड़ियाघर में बाघिन को दर्शकों के लिए न खुले में न रखकर सुरक्षित स्थान पर रखा गया है। आम दर्शक कमजोर होने की वजह से उसे देख नहीं सकते।
डॉ. एच राजा मोहन, एफडी टाइगर रिजर्व पीलीभीत