पीलीभीत। फर्जी लाइसेंस बनाने के साथ असलहों की बिक्री करने वाला खुटार के दुर्गा गन हाउस का मालिक हरिशंकर अवस्थी गिरोह का मास्टर माइंड है। कुछ माह पहले उसके बनाए फर्जी लाइसेंस ट्रांसफर के लिए आए तो डीएम गाजियाबाद को शक हो गया। उन्होंने जांच शुरू करा दी। इसमें मामले की परत दर परत खुलती चली गई। अगस्त 2019 में गाजियाबाद में हरिशंकर अवस्थी और उसके अन्य साथी जेल भेज दिए गए। उसकी दुकान भी सील बताई जा रही है।
हरिशंकर अवस्थी इस धंधे में पूरी तरह से रम चुका था। वह फर्जी लाइसेंस बनाने के लिए 30 से 40 हजार रुपये लेता था। इसके बाद फर्जी मोहर और अन्य कागजात के आधार पर फर्जी लाइसेंस बना लेता। असलहा अपनी दुकान से बिक्री कर देता था। एक राइफल को मोटीफाई करने के लिए दस हजार रुपये लिए गए। उसके इस काम में शाहजहांपुर के असलहा विभाग के भी कुछ लोगों से साठगांठ रहती थी। यह बात उसकी धरपकड़ के बाद पहले ही सामने आ चुकी है। बताते हैं कि हरिशंकर गन हाउस से लाइसेंस पर असलहा चढ़ाता था। इसके बाद असलहा विभाग में बैठे उसके मददगार यूनिक आईडी जनरेट करते थे। सर्विलांस स्वॉट टीम की ओर से बरामद किए असलहों की यूनिक आईडी चेक कराई गई, तो कोई रिकार्ड नहीं मिला है। इससे उनके पूरी तरह से फर्जी माना जा रहा है। खास बात है कि सभी असलहों के फर्जी लाइसेंस 2000 से 2008 के बीच बनाए हुए हैं। हालांकि अधिकारियों का मानना है कि ये असलहा बैकडेट में बनाए गए हैं। अभी और कितने असलहा इस तरह के हैं, इसको लेकर पड़ताल की जा रही है।
ये असलहा हुए बरामद
टीम ने सात असलहा बरामद किए हैं। इसमें तीन 315 बोर राइफल, तीन 32 बोर पिस्टल और एक 12 बोर डीबीबीएल गन है। पकड़े गए इकरार और जहांगीर की राइफलों के अलावा अन्य पांच असलहा उनके मालिकों के घर से बरामद किए गए हैं।
ये आरोपी भी चल रहे फरार
इस मामले में सेहरामऊ उत्तरी थाना क्षेत्र के हरिपुर किशनपुर निवासी भूपेंद्र सिंह गोल्डी, देव नरायण्स वर्मा, बलजिंदर सिंह, नजीरगंज दुर्जनपुर निवासी शकील बेग, मरौरी बिलसंडा के बृजेश कुमार सिंह, दुर्गा गन हाउस खुटार के मालिक हरिशंकर अवस्थी (गाजियाबाद जेल में बंद) की तलाश पुलिस कर रही है।
जहांगीर पर डकैती, शकील पर वन अधिनियम की दर्ज है रिपोर्ट
अभी तक की जांच में सामने आए असलहा खरीदने वाले आठ जालसाजों का पुलिस ने आपराधिक इतिहास खंगाला है। इसमें पकड़े गए जहांगीर पर डकैती, छेड़छाड़ और फरार शकील बेग पर उत्तर प्रदेश वन संरक्षण अधिनियम व 26 क भारतीय वन अधिनियम की रिपोर्ट पूर्व में दर्ज मिली है। दोनों एफआईआर सेहरामऊ उत्तरी थाने में दर्ज है।
...तो अभिलेख गायब होने का उठाया लाभ
दरअसल, सेहरामऊ उत्तरी थाने का इलाका पहले शाहजहांपुर जिले में था। 2008 में यह पीलीभीत में शामिल कर दिया गया। करीब 60 गांव पीलीभीत में आ गए थे। इन गांवों के शस्त्र लाइसेंसों के अभिलेख गुम हो गए। उधर, सेहरामऊ उत्तरी थाने का असलहों से जुड़ा रजिस्टर खो गया। इसी का सर्वाधिक लाभ सरगना को मिला।
लाइसेंस की ओरिजनल कॉपी किसी पर नहीं
बरामद असलहों को लेकर पुलिस ने लाइसेंस चेक किए। इसमें किसी की ओरिजनल कॉपी नहीं मिल सकी है। सभी जगह डुप्लीकेट कॉपी लिखे कागज दिखाए गए। यही वजह रही कि पुलिस को उनकी हकीकत परखने में देर न लगी।
शौक के लिए खरीदने की आ रही बात
एसपी अभिषेक दीक्षित ने बताया कि अभी ये कहना मुश्किल है कि इन असलहों को खरीदने का मकसद अपराध के लिए रहा होगा। ऐसे कोई साक्ष्य नहीं मिले हैं। सिर्फ शौक के लिए फर्जी लाइसेंस बनवाकर असलहा लेने की बात निकल रही है। हालांकि पड़ताल जारी है।