शाहगढ़ के मदरसे में जुमे की नमाज को लेकर शुक्रवार दो समुदायों में हुए पथराव, फायरिंग मामले में एसओ राजेंद्र सिंह की ओर से 17 आरोपियों को नामजद करने के साथ 130-140 अज्ञात उपद्रवियों के खिलाफ हत्या का प्रयास, बलवा समेत कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। इसी के साथ हिरासत में लिए गए सभी 12 आरोपियों को जेल भेज दिया गया। घटना के दूसरे दिन भी गांव में दहशत का माहौल रहा। सीओ, एसडीएम पूरे दिन जहां गांव में डटे रहे, वहीं दोपहर बाद एसपी जेके शाही ने भी गांव पहुंच हालात का जायजा लिया।
थानाध्यक्ष राजेंद्र सिंह की ओर से दर्ज कराई रिपोर्ट में कहा गया कि वह शुक्रवार को दरोगा राहुल सिंह पुंडीर, सिपाही भुवनेश शर्मा व अवधेश के साथ वाहन चेकिंग कर रहे थे। इस बीच सूचना मिली कि शाहगढ़ में बड़ी संख्या में हिंदू समुदाय के लोग एकत्र हुए हैं। जहां मदरसे में जुमे की नमाज को लेकर विवाद बढ़ रहा है। इस पर कलीनगर व शाहगढ़ चौकी से पुलिसकर्मियों को पहुंचने का आदेश देने के साथ मौके पर पहुंचे। वहां पहुंचने पर लोगों को समझाने का प्रयास किया गया। अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए थे, लेकिन भूपराम सिंह सहित पांच-छह लोगों ने बात मानने से इंकार करते हुए मदरसे को फूंकने के लिए उकसाना शुरू कर दिया, जिससे उत्तेजित होकर लोगों ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। मुस्लिम समुदाय के लोग घरों में जा घुसे। सिपाही भुवनेश शर्मा ने दो राउंड रबर बुलेट चलाकर उपद्रवियों को तितर-बितर करने की कोशिश की, जिस पर उन्होंने अवैध शस्त्रों से पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी। इसके बाद पीएससी व पुलिस को साथ लेकर उपद्रवियों को खदेड़ा गया। पुलिस ने महेंद्र, जगदीश, लालता प्रसाद, लालता प्रसाद पुत्र प्यारेलाल, पंकज वर्मा, हरीओम, रमाकांत, ओमप्रकाश, बाबूराम, तिलकराम, हरीओम पुत्र दयाराम व हरीप्रसाद को गिरफ्तार कर लिया गया। इन 12 लोगों सहित भूपराम, गयादीन, ओमप्रकाश, रामऔतार, लाल सिंह राना सहित 130-140 अज्ञात उपद्रवियों के साथ धारा 147, 148, 149, 307, 336, 332, 353, 505 (2), 295ए आदि के तहत शुक्रवार देर शाम मुकदमा दर्ज किया। उन्होंने बताया कि शनिवार को उक्त 12 लोगों को न्यायालय में पेश करने को चालान भेजा गया जहां से सभी को जेल भेजा दिया गया। घटना में सिपाही भुवनेश शर्मा व अवधेश घायल हो गए। जिन्हें इलाज के लिए भेजा गया है।
शाहगढ़ में हालात तेजी से सामान्य हो रहे हैं। यह सही है कि दोनो समुदाय के कुछ लोगों ने गांव छोड़ा है, जिन्हें गांव लौटने के लिए कहा गया है। लोगों से शांति व्यवस्था बनाए रखने की अपील की गई है। पुलिस सिर्फ उन आरोपियों पर ही कार्रवाई करेगी, जिन्होंने घटना को अंजाम दिया। बाकी सभी की हिफाजत के लिए पुलिस हर संभव प्रयास कर रही है।
-जेके शाही, एसपी
चंद लोगों की वजह से हुआ टकराव
शाहगढ़ स्थित गौसिया मदरसे में जुमे की नमाज को लेकर उपजे विवाद में एक समुदाय के चंद लोगों के चक्कर में ही बवाल हुआ। पुलिस के अनुसार यह योजनाबद्ध था।
शाहगढ़ गांव में मदरसे की जमीन वर्षों पूर्व गांव के मल्लू ने दी थी। मदरसे को लेकर पहले भी गांव के दूसरे समुदाय के लोगों ने विरोध किया था, लेकिन पिछले 10-12 वर्षों से समझौता होने के बाद मदरसा चल रहा था। इधर पिछले कुछ दिनों से दूसरे समुदाय की एक विशेष जाति के कुछ लोग मदरसे में जुमे की नमाज का विरोध दबी जुबान से करने लगे थे। पुलिस चौकी शाहगढ़ पर भी विरोध जताया गया, लेकिन पुलिस ने इसको हल्के में लिया। जबकि पूर्व वर्षों में मदरसे को लेकर दो समुदाय आमने-सामने आ चुके थे। उधर जब मुस्लिम समुदाय के लोगों को नमाज के विरोध की भनक लगी तो उन्होंने जिला मुख्यालय पहुंचकर एक सपा के वरिष्ठ नेता को मामले की जानकारी दी। इस पर उन्होंने पुलिस अफसरों से कहा कि यदि पहले से वहां नमाज हो रही है तो नमाज पढ़ने में बाधा उत्पन्न न हो और पुलिसकर्मी तैनात कर दिए जाएं। इसके बाद शुक्रवार को करीब तीन बजे तीन पुलिसकर्मी मौके पर पहुंच गए थे, लेकिन जब मदरसे के निकट होली तिराहे पर दूसरे समुदाय के लोगों की भीड़ एकत्र होने लगी तो पुलिस कर्मियों ने मामले की सूचना अफसरों को दी, जिसके बाद भारी पुलिस बल मौके पर पहुंच गया।
एसओ राजेंद्र सिंह बताते हैं कि लोगों की समझाने का प्रयास किया गया, लेकिन कुछ लोग बवाल ही करना चाह रहे थे। इसी के चलते सुनियोजित ढंग से पुलिस पर पथराव व फायरिंग शुरू कर दी गई। बचाव में पुलिस ने भी रबर बुलेट चलाई थी। एसओ ने भी स्वीकार किया कि इस पूरे घटनाक्रम में एक समुदाय के एक विशेष जाति के लोगों ने ही पथराव व फायरिंग की, शेष जाति के लोग सामने नहीं नहीं आए। पुलिस का मानना है कि इसी के चलते बड़ा टकराव होने से बच गया।