मंडी में धान की आवक बढ़ने के बाद भी खरीद में तेजी नहीं आ रही है। सरकारी खरीद न होने से किसानों आढ़तों पर धान बेचने को विवश हैं। शनिवार को मंडी में 20 हजार क्विंटल आवक दर्ज की गई। मगर किसानों को उनका पूरा दाम नहीं मिल सका। ज्यादातर किसानों को 850 से 900 रुपये प्रति क्विंटल तक का रेट मिला।
किसानों के लिए धान का उत्पादन मुसीबत बनता जा रहा है। प्रशासन किसानों को धान का वाजिब मूल्य नहीं दिला पा रहा है। शनिवार को मंडी में दोपहर बाद एकाएक ट्रालियों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हुआ जिससे शाम तक यहां धान की आवक 20 हजार क्विंटल से अधिक हो गई। धान के कारण मंडी में आढ़तों के अलावा सड़कों पर भी ढेर लगे हैं लेकिन सरकारी केंद्रों पर खरीद निहीं हो रही है। इसके कारण किसानों को फसल का वाजिब दाम नहीं मिल पा रहा है।
दिखावे को मंडी में कुछ ढेरियों की बोली लगाकर औपचारिकता भी निभाई गई। इसमें एक सबसे अच्छी ढेरी 1125 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बिकी। बाकी धान का रेट 850, 900 और 950 रुपये का ही दाम मिला। वहीं मंडी में लगे एफसीआई के क्रय केंद्र पर भी एक किसान का धान खरीदा गया। मंडी सचिव ने बताया रविवार को मंडी के अवकाश के कारण आवक अधिक रही है। किसानों के सामने धान की नीलामी कराकर बिक्री कराई जा रही है।