राइस मिलर्स द्वारा की जा रही सीधी खरीद पर प्रशासन अंकुश नहीं लगा पा रहा है इससे जहां राजस्व को नुकसान हो रहा है वहीं किसानों को भी धान का पूरा दाम नहीं मिल पा रहा है। दूसरी तरफ व्यापारी और मिलर्स खरीद गए धान को मिलीभगत के चलते सरकारी खरीद दर्शाकर खेल किया जा रहा है।
शासन ने धान खरीद को न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करने के साथ ही सरकारी खरीद केंद्र व आढ़तों के माध्यम से खरीद के निर्देश दिए हैं। लेकिन जिले में राइस मिलर्स सीधी खरीद कर शासन के नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। मिलर्स किसानों से सीधी खरीद कर धान का स्टाक कर रहे हैं। इससे जहां मंडी टैक्स की चोरी हो रही है वहीं किसानों को भी धान का पूरा दाम नहीं मिल पा रहा है। दूसरी ओर मंडी में व्यापारियों द्वारा बड़े पैमाने पर खरीदा जा धान भी राइस मिलों पर पहुंच रहा है। व्यापारी और राइस मिलर्स द्वारा की जा रही यह खरीद अधिकारियों की मिलीभगत के कारण फलफूल रही है यही कारण है कि सरकारी क्रय केंद्र सूने पड़े हैं और आंकड़ों में सरकारी खरीद हो रही है। आंकड़ों की बात करें तो जिले में अब 6.85 मीट्रिक टन धान की खरीद हो चुकी है।
किसान को नहीं मिल पा रहे दाम
सरकारी क्रय केंद्रों पर खरीद न होने से किसानों को मजबूरी में राइस मिलर्स और आढ़तों पर धान बेचना पड़ रहा है। बड़ी मात्रा में धान पहुंचने और व्यापारियों की खरीद की व्यवस्थाएं सीमित होने का प्रभाव धान के रेट पर पड़ रहा है। शुक्रवार को मंडी में 35 हजार क्विंटल धान की आवक हुई लेकिन किसान को 880 से 1060 रुपये तक के ही दाम मिले।
मंडी समिति की परिधि में आने वाली राइस मिलों पर सीधी खरीद नहीं हो रही है। क्षेत्र से बाहर की मिलों को धान खरीदने का अधिकार है। यदि कहीं से भी शिकायत मिलती है तो जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
सुरेश यादव, डिप्टी आरएमओ