बेसिक शिक्षा विभाग के अधीन संचालित स्कूलों में दो अप्रैल से नया शैक्षिक सत्र शुरू हो रहा है, लेकिन इस फेरबदल का प्रभाव सिर्फ कागजों तक सीमित दिख रहा है। बच्चों को न तो नि:शुल्क पुस्तकें ही मिल सकी हैं और न ही अभी तक उन्हें यूनिफार्म दी गई है। किताबें और यूनिफार्म कब तक मिलेगी, इसका भी विभाग के पास कोई जवाब नहीं है।
किताबें हीं नहीं हैं तो पढ़ेंगे क्या
जिले में करीब 1800 प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। इस बार भी बच्चों को बिना किताबों के ही स्कूल जाना पड़ेगा। हालांकि पिछला सत्र खत्म होने के दौरान यह कहा गया था कि जुलाई में स्कूल खुलने पर नि:शुल्क पुस्तकें उपलब्ध कराई जाएंगी। स्कूल खुलने वाले हैं, लेकिन अभी तक विभाग को ही किताबें उपलब्ध नहीं हो पाई हैं। ऐसे में स्कूल जाने वाले बच्चों को एक बार फिर बिना किताबों के ही पढ़ाई करनी होगी। हालांकि महकमा पुरानी किताबों से ही पढ़ाई शुरू कराने की बात कह रहा है।
तीन माह बाद भी नहीं मिली ड्रेस
परिषदीय स्कूलों के बच्चों को फटी-पुरानी यूनिफार्म में ही स्कूल जाना पड़ेगा। हालांकि यूनिफार्म वितरण को लेकर कार्यक्रम घोषित हो चुका है, लेकिन बजट का अभी नामोनिशान नहीं है। ऐसे में यदि बजट आ भी जाता है तो सितंबर तक यूनिफार्म का कार्य पूरा हो सकेगा। हालांकि महकमे ने मार्च में ही शासन को डिमांड भेज दी थी।
वर्जन:
नि:शुल्क यूनिफार्म वितरण को लेकर शासनादेश प्राप्त हो चुका है। बजट मिलते ही यूनिफार्म वितरित करा दी जाएगी। नि:शुल्क पुस्तकें भी अभी उपलब्ध नहीं हो सकी हैं। बच्चों को पुरानी पुस्तकें मुहैया कराई गई हैं।
-उमेश गौतम, प्रभारी बीएसए