शारदा डैम सहित नहरों और नदियों में एक जुलाई से मछली के शिकार पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह पाबंदी तीस जून के बाद मछली का प्रजननकाल होने के चलते लगाई गई है।
बाइस किमी लंबे शारदा डैम में तीन वर्ष के लिए मछली नीलामी ठेका होता है, लेकिन एक जुलाई से दो माह के लिए मछली के शिकार पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है। इस बार भी एक जुलाई से डैम में शिकार पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। साथ ही सिंचाई विभाग की नहरों, झीलों और जलाशयों में शिकार पर प्रतिबंध रहेगा। उधर, शारदा डैम के ठेकेदारों ने बृहस्पतिवार शाम से शिकार खेलने वाली नावें किनारे लगा ली हैं। हालांकि टाइगर रिजर्व बनने के बाद से ही यहां शिकार पर प्रतिबंध है, लेकिन अब मछली का शिकार करने और कराने वाले लोग शारदा डैम सहित नहरों में अवैध शिकार के लिए पुलिस और वन विभाग के पास अपनी सौदेबाजी करने में जुट गए हैं। यदि इन दोनों विभागों से मौन स्वीकृति मिल जाती है तो चोरी छिपे यह शिकार फिर शुरू हो जाएगा। सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता पीके तिवारी ने बताया कि तीस जून के बाद मछली के ठेके की अवधि समाप्त हो जाती है। मछली के प्रजननकाल के चलते एक जुलाई से मछली के शिकार पर प्रतिबंध लगाया गया है।