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तीन साल में बाद भी नहीं मिली सुविधाएं

Mon, 30 Oct 2017 11:12 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो माधोटांडा/पीलीभीत।
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जगल - फोटो : अमर उजाला
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जंगल किनारे बसे लोगों की सुरक्षा भगवान भरोसे
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मानव वन्यजीव संघर्ष रोकने को भी ठोस उपाय नहीं
जिले के जंगलों को टाइगर रिजर्व घोषित हुए तीन वर्ष से अधिक का समय बीत चुका है लेकिन अब तक जंगल किनारे बसे लोगों को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिली है। जलौनी लकड़ी हो या छप्पर बनाने को घास, छोटी-छोटी जरूरत भी पूरी नहीं हो रही हैं। वहीं दूसरी सबसे बड़ी समस्या सुरक्षा को लेकर है। खुद मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद भी तार फेसिंग का काम शुरू तक नहीं हो पाया है। किसानों को खुद तार फेसिंग करानी पड़ रही है।
टाइगर रिजर्व बनने के बाद विभाग से इसके 10 किमी क्षेत्र में आने वाले 275 गांव चिह्नित किए गए थे। इन गांव में गैर वानिकी कार्यों पर रोक लगा दी गई साथ ही ग्रामीणों की जंगल पर निर्भरता कम करने को ठोस उपाय करने का दावा किया गया था। ग्रामीणों को गैस कनेक्शन के अलावा आवास, शौचालय सहित तमाम मूलभूत सुविधाओं के अलावा उन्हें आजीविका से जोड़ने की भी योजना थी लेकिन सब कोरी घोषणाएं ही साबित हुई। 
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मुख्यमंत्री से सिफारिश, केंद्र से धेला नहीं
केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री जिले की सांसद होने के साथ पर्यावरण प्रेमी भी है। माना जाता है कि टाइगर रिजर्व बनने में उनकी भी अहम भूमिका है। लेकिन हैरानी की बात है कि वह जंगल से सटे गांव को सुख सुविधाएं दिलाने के लिए मुख्यमंत्री से अनुरोध कर रही है जबकि टाइगर रिजर्व को एनटीसीए से कुल मांग का आधा बजट भी नहीं दिला सकी जबकि प्रधानमंत्री खुद एनटीसीए के अध्यक्ष होते हैं। टाइगर रिजर्व प्रशासन ने 14 करोड़ का प्रस्ताव एनटीसीए को भेजा जिसमें मात्र सात करोड़ ही मिला है।
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ओडीएफ भी नहीं हुए गांव
जंगल से सटे क्षेत्र में कुल 275 गांव चिह्नित हैं, जिसमें 99 ग्राम पंचायतें हैं। लगभग पांच माह पूर्व इन सभी को ओडीएफ (खुले में शौच मुक्त) बनाने की कवायद शुरू हुई थी लेकिन अब तक मात्र 11 गांव ही ओडीएफ हो सके हैं जबकि चार में प्रक्रिया चल रही है। इस गति से तीन साल में भी जंगल से सटे गांव ओडीएफ नही हो पाएंगे।
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गैस कनेक्शन दे दिया गैस कहां से लाए
जंगल किनारे बसे ग्रामीणों को जलौनी लकड़ी के प्रयोग से बचाने के लिए लगभग 25 प्रतिशत परिवारों को उज्जवला योजना एवं डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की ओर से गैस कनेक्शन वितरित किए गए हैं लेकिन आर्थिक तंगी और गैस एजेंसी दूर होने के चलते गैस सिलेंडर लेने में दिक्कत आ रही है। जब तक उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ नहीं होती तब तक गैस कनेक्शन अनुपयोगी है।
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तार फेसिंग की शुरूआत तक नहीं
जंगल किनारे क्षेत्रों मेे बाघ की घटनाएं बढ़ने पर तार फेसिंग की घोषणा की गई थी। इसके लिए केंद्रीय मंत्री ने सांसद निधि से 15 लाख एवं दो विधायकों ने 5-5 लाख रुपये जारी किए हैं। इसके लिए एनटीसीए से मांगे गए 3.80 करोड़ के बदले 1.50 करोड़ रुपये जारी हुए हैं लेकिन विभागीय लापरवाही के चलते अब तक इसका काम शुरू नहीं हो पाया है।
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जंगल किनारे पहले मिले गन्ना पर्ची
जंगल से सटे इलाकों के गन्ना किसानों को पहले गन्ना पर्ची जारी कर उठवाने की इजाजत दी जाए जिससे बाघ और जंगली सूअर गन्ने के खेतों का सहारा लेकर मानव पर हमले ना कर सके।
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शिव कुमार, ग्राम मल्लपुर
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करंट न होने से अनुपयोगी है तार फेसिंग
हल्दीडेंगा क्षेत्र में जो तार फेंसिंग कराई गई हैं उसमें  करंट ना होने या मामूली होने के कारण शाम होते ही वन्यजीव कृषि फसलों की ओर टूट पड़ते है।
हसमतुल्ला खां, प्रधान डगा
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लकड़ी उपलब्ध कराने को खुले टाल
जंगलों में आवाजाही बंद होने से सस्ती दरों पर ईंधन जलाने की दुकानें खुलवाई जाएं जिससे गरीब अपना घर का चौका चूल्हा जलाने में जंगल जाने से बच सकें।
अजय कुमार, प्रधान ग्राम कल्लिया
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टाइगर रिजर्व के लिए एनटीसीए से धनराशि उपलब्ध कराई गई है। इससे सटे गांव में जो भी योजनाएं चल रही हैं वह प्रदेश के माध्यम से ही चल रही हैं। इनमें तेजी लाकर प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराने का प्रयास किया जा रहा है।
मेनका गांधी, केंद्रीय मंत्री
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