जिले के अधिकांश घरों और औद्योगिक क्षेत्रों में पानी का अंधाधुंध दोहन किया जा रहा है। कुछ लोग पानी से कमाई कर रहे हैं। मगर कमाई के लिए धरती की कोख खाली करने वालों के खिलाफ न तो जिला प्रशासन सख्त है और न ही नगर पालिका। जिले भर में पानी का अवैध तरीके से कारोबार बेरोकटोक चल रहा है।
वॉटर प्लांट व ऑटो वाशर कर रहे हैं पानी से कमाई
शहर में करीब 50 से अधिक छोटे बड़े ऑटो वॉश सेंटर हैं। करीब आधा दर्जन से अधिक वॉटर प्लांट लगे हुए हैं। वॉटर प्लांट संचालक ग्राहकों से दस रुपये केन व ऑटो वॉशर सेंटर 20 से 100 रुपये तक प्रति वाहन वसूलते हैं। मगर यह ऑटो वॉश सेंटर और प्लांट मालिक इसके बदले पालिका को टैक्स नहीं देते हैं और ही इन्होंने लाइसेंस शुल्क ही दिया।
जुबानी बनते रहे कानून
वॉटर प्लांट व ऑटो वाश सेटरों से पालिका प्रशासन आज तक न टैक्स वसूल सका और न ही पानी के अंधाधुंध दोहन पर रोक लगा पाया। पालिका बोर्ड बैठकों में इसको लेकर खूब हो हल्ला हुआ, लेकिन पानी का दोहन करने वालों से टैक्स वसूली की कोई रणनीति नहीं बनी।
कर विभाग आज तक नहीं बना सका बायलॉज
वॉटर प्लांटो व ऑटोवाश सेंटर से टैक्स वसूली को लेकर जब पालिका सदस्यों ने आपत्ति जताई तो कर विभाग को वायलॉज बनाने के निर्देश दिए गए। खास बात यह है कि तबसे लेकर आज तक पालिका का कर विभाग बायलॉज ही नहीं बना सका।
कैसे संचालित हो रहे है धंधा?
ऐसा भी नहीं है कि पालिका प्रशासन को प्राकृतिक संपदा की बिक्री कर मोटी कमाई करने वालों की जानकारी न हो, लेकिन वह इन पर रोक लगाने को कोई फार्मूला न होने की बात कहता आ रहा है। यह वॉशिंग सेंटर व प्लांट बिना जलमूल्य दिए बगैर कैसे चल रहे हैं, यह एक बड़ा सवाल है।
जलमूल्य न देने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई
शहर में कई वॉशिंग सेंटर व वॉटर प्लांटों को जलमूल्य के दायरे में लाने की कार्रवाई चल रही है। इन सभी को चिंहित कर नोटिस भेजे जा चुके हैं। इसके बावजूद यह टैक्स नहीं जमा करते हैं तो इन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। - प्रभात जायसवाल, नगरपालिका अध्यक्ष