कहने को तो जिला अतिविशिष्ट संसदीय क्षेत्र में आता है, लेकिन जिला
मुख्यालय के विकास पर गौर करें तो यहां समस्याएं ही समस्याएं हैं। अब शहर
की फुटपाथ व्यवस्था को ही लें तो पूरा शहर ही फुटपाथ विहीन है और पटरियों
पर बरसों से अतिक्रमण। फुटपाथ न होने से ही शहरवासियों को रोजाना जाम की
समस्या से दो चार होना पड़ रहा है।
सड़कें बनीं पर नहीं बना फुटपाथ
शहर
में वर्ष 2007 में स्टेशन चौराहा से लेकर कोतवाली तक और स्टेशन चौराहा से
नकटादाना चौराहा तक सड़क बनाई गई थी। सड़क निर्माण के दौरान दोनों ओर खाली
पड़ी जगह पर फुटपाथ न बनता देख लोगों ने कड़ा विरोध
जताया था। शिकायत
को गंभीरता से लेते हुए तत्कालीन डीएम नवदीप रिनवा ने संबंधित अफसरों की
बैठक लेकर मार्ग निर्माण में बची धनराशि से फुटपाथ बनाने के निर्देश दिए
थे। बाद में पता चला कि धनराशि ही नहीं बची।
पौने दो करोड़ का बनाया गया था प्रोजेक्ट
फुटपाथ
निर्माण का मामला ठंडे बस्ते में जाता देख उस दौरान अध्यक्ष प्रभात
जायसवाल ने फुटपाथ निर्माण का बीड़ा उठाया। करीब पौने दो करोड़ की
कार्ययोजना बनाकर शासन को भेजी गई, लेकिन कुछ दिन फाइल इधर उधर घूमने केबाद
रद्दी की टोकरी में डाल दी गई।
इसलिए है फुटपाथ की जरूरत
- टनकपुर रोड पर है आधा दर्जन स्कूल-कॉलेज
- सड़क किनारे कब्जा नहीं कर सकेंगे दुकानदार
- अनचाही जगह पर नहीं हो सकेगी पार्किंग
- ठेले फड़ वाले भी नहीं कर सकेंगे कब्जा
- जाम की समस्या से मिल सकेगी निजात
शहर
में फुटपाथ की आवश्यकता है। पूर्व में करोड़ों का प्रोजेक्ट बनाकर भेजा
गया था, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। हालांकि अब जो भी नई सड़कें
बनाई जाएंगी, उस पर फुटपाथ बनाया जाएगा।
प्रभात जायसवाल, नगरपालिका अध्यक्ष