पीलीभीत। हाईवे पर हादसों की रोकथाम के लिए कोई भी प्रभावी कदम नहीं उठाया जा रहा है। संकेतक बोर्ड, स्पीड ब्रेकर पीली पट्टी, रेडियम लाइटों की भी व्यवस्था नहीं है। असम हाईवे की चौड़ाई तो बड़ा दी गई, मगर गड्ढा नहीं भरे गए। शाहजहांपुर हाईवे पर खमरिया मोड़ के पास बड़ा गड्ढा कई हादसों की वजह बन चुका है, मगर उसे सही नहीं कराया गया। बड़े हादसों से भी सबक नहीं लिया जा रहा है।
जिले से तीन हाईवे गुजर रहे हैं। इनसें असम हाईवे, टनकपुर-शाहजहांपुर हाईवे और हरिद्वार हाईवे शामिल हैं। इन सड़कों को हाईवे का दर्जा तो मिल गया, मगर मानक अभी तक पूरे नहीं किए गए हैं। हाईवे होने से वाहनों की स्पीड तो बढ़ गई, मगर हादसों के रोकथाम के लिए कोई बंदोबस्त नहीं किया गया है। यहां तक कि नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) का जिले में एक भी अधिकारी नहीं बैठता।
असम हाईवे पर लगातार बड़े हादसे हो रहे हैं। हाईवे से लिंक रोड मोड़ पर भी कोई संकेतक बोर्ड और पहचान चिह्न नहीं बनाया गया। कई स्थानों पर साइड पट्टी तक नहीं है। हाईवे पर रेडियम लाइट लगाने के भी प्रयास नहीं किए गए हैं। इससे हादसों डर बना रहता है। वहीं, टनकपुर हाईवे शहर के बीच से गुजर रहा है। शहर के अंदर रोड के गड्ढे तो भर दिए गए, मगर फुटपाथ नहीं बनवाया गया। इससे फुटपाथ से सड़क की ऊंचाई काफी हो गई है। इस हाईवे के चौराहों पर शहर के अंदर फोर्स तैनात कर दी गई, मगर पुलिसकर्मी हादसों को लेकर गंभीर नहीं हैं। चौराहों से बेतरतीब वाहन दिनभर गुजरते रहते हैं।
इस लापरवाही से एक माह पहले गौहनिया चौराहे पर एक महिला और डिग्री कॉलेज चौराहे पर एक महिला हादसे में जान गवां चुकी है। वहीं इस हाईवे से शाहजहांपुर की ओर खमरिया मोड़ पर काफी गहरा गड्ढा है। एक माह पहले इसी गड्ढे के कारण एक रेलवेकर्मी जान गंवा चुका है और कई हादसों में लोग चोटिल हो चुके है। हरिद्वार हाईवे पर जहानाबाद से पहले पुल पर कई बार हादसे हो चुके हैं। अक्सर ट्रक फंस जाते हैं। निसरा के पास भी आए दिन हादसे होते है, मगर इस समस्या को लेकर कोई भी गंभीर नहीं है।
नियमों के पालन से हादसों लाई जा सकती है कमी
- चालक लगातार वाहन चलाने से बचें। आराम करने, पर्याप्त नींद लें और आंखों की जांच कराएं।
- गति और अन्य मुख्य नियंत्रणों की रिकार्डिंग की वाहन में सुविधा होनी चाहिए।
- वाहनों में अगर कैमरे की सुविधा होती है, तो दुर्घटना के बाद कारण पता किया जा सकता है।
- ब्लैक स्पॉट्स को चिह्नित करते हुए एक्सीडेंट जोन बनाकर निगरानी बढ़ाई जाए ।
- सड़कों का वार्षिक ऑडिट किसी मान्यता प्राप्त एजेंसी से कराया जाए। रिपोर्ट सड़क एजेंसी की वेबसाइट पर अपलोड की जाए।
- व्यावसायिक और यात्री वाहनों की ओवरलोडिंग की जांच सभी टोल प्लाजा पर अनिवार्य कर दी जाए।
- ओवर स्पीड और ओवरलोडिंग पर तत्काल कार्रवाई की जाए। जिससे वाहन चालक मानक के अनुसार सड़क पर चलें।
- कहीं भी कोई भी चालक नियमों का उल्लंघन करे तो उसके लाइसेंस का निरस्तीकरण करने की प्रकिया शुरू की जाए।
रात में चालक को अधिक होती है थकान
शाम को लाइट की रोशनी आंखों पर पड़ने से वाहन चालक को अधिक थकान महसूस होती है। इससे चालक 150 से 200 किलोमीटर या फिर दो से ढाई घंटा वाहन चलाने के बाद रुककर आराम जरूर करें। रात में वाहन चलाने से चालक बचें। अगर आपात स्थित में जाना हो तो दो ड्राइवर होने चाहिए।
पिकअप और लोडर नहीं है यात्री वाहन, होगी कार्रवाई
पिकअप और लोडर यात्री वाहन नहीं हैं। इसके बाद भी लोग किराए पर इन वाहनों में यात्रा करते हैं। यात्री भी क्षमता से अधिक बैठते हैं। परिवहन विभाग ने ऐसे वाहन स्वामियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है।
एनएचएआई के साथ परिवहन विभाग करेगा मंथन
गजरौला में हादसे के बाद परिवहन विभाग के अधिकारी एनएचएआई के अभियंताओं के साथ मंथन करेंगे। सभी हाईवे का सर्वे किया जाएगा। अगर कहीं कोई खामी मिलती है, तो उसे तत्काल दुरुस्त कराया जाएगा।
लोडर वाहनों में यात्री नहीं बैठाने दिए जाएंगे। एनएचएआई के अभियंताओं के साथ सड़कों की सर्वे की जाएगी। अगर कहीं कोई समस्या मिलती है, तो उसे सही कराया जाएगा। लोडर वाहनों में यात्री मिलने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। - अमिताभ राय, एआरटीओ प्रवर्तन