आगामी वर्ष चुनावी वर्ष है और सरकार ने वर्ष 2016-17 को पुन: किसान वर्ष के रूप में मनाने की घोषणा की है। ऐसे में कृषि आधारित तराई के इस जिले को आगामी वर्ष के बजट में अलग से कुछ मिलने की उम्मीद जिले के लोगों को थी, लेकिन किसान और कृषि आधारित उद्योग धंधों से जुड़े लोगों को अलग से कुछ भी मिलने की उम्मीद नजर नहीं आ रही है। वजह शासन द्वारा इसके लिए जिले से अलग से कोई प्रस्ताव न मांगना भी है। ऐसे में केवल पूरे प्रदेश के लिए बन रही योजनाओं का लाभ ही जिले के लोगों को मिलने की उम्मीद है। कृषि विभाग के अधिकारियों ने भी शासन द्वारा जिले में कृषि के प्रोत्साहन के लिए अलग से कोई योजना या प्रस्ताव न मांगे जाने की पुष्टि की है। वहीं बदहाली की स्थिति से गुजर रहे किसान सरकार से काफी उम्मीद लगाए गए बैठे हैं।
फैक्ट फाइल
- कृषक क्षेत्रफल (हेक्टेअर)
सीमांत कृषक 1.89 लाख 1.31 लाख
लघु कृषक 0.21 लाख 0.98 लाख
वृहद कृषक 0.46 लाख 0.08 लाख
कुल 2.19 लाख 2.37 लाख
राइस मिल एसोसिएशन जिलाध्यक्ष ने अश्विनी अग्रवाल बाोले कृषि प्रधान जिले में शुगर व राइस मिलें पर्याप्त हैं, लेकिन कृषि अवशेष (भूसा, पुआल, भूसी, खोई) आदि के लिए कोई विकल्प नहीं है। सरकार इन अवशेषों के उपयोग के लिए जिले में गत्ता या पेपर मिल की स्थापना करा सकती है। साथ ही भूसी से बिजली उत्पादन यूनिट भी स्थापित की जा सकती है।
किसानों को मिले बोनस
गेहूं के नुकसान और गन्ने का पूरा दाम न मिलने से बदहाल हो चुके किसानों को घाटे से उबरने के लिए सरकार को जिले के किसानों को बोनस देने के लिए अलग से बजट की व्यवस्था करनी चाहिए। - सतविंदर सिंह काहलो, भाकियू जिलाध्यक्ष