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शारदा डैम में नहीं गूंजता मेहमान पक्षियों का कलरव

Thu, 03 Dec 2015 11:45 PM IST
Madotanda
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तराई क्षेत्र के शारदा डैम में साइबेरिया, अलास्का आदि देशों में बहुतायत में अधिक ठंड पड़ने के कारण बड़ी तादाद में प्रवासी पक्षी हर साल यहां पहुंचते हैं, लेकिन पिछले कुछ सालों से इनकी संख्या में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। इसकी खास  वजह ग्लोबल वार्मिंग व भोजन की कमी होना माना जा रहा है।
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प्रवासी पक्षियों को नहीं मिल पा रहा भोजन
शारदा डैम में पाई जाने वाली छोटी मछलियों प्रवासी पक्षियों का मुख्य भोजन होती है, लेकिन मछलियों की ब्रीडिंग न होने से उनकी भी तादाद घटने लगी है। मछली की ब्रीडिंग न होने का एक कारण यह है कि डैम में गिरने वाली नहर के सामने का भाग सिल्ट से पट गया है, वहीं दूसरी गिरने वाली नहर में सिल्ट के साथ लोग खेती करने लगे हैं। करीब चार दशक से डैम की सफाई भी नहीं कराई गई। इसके चलते प्रवासी पक्षियों को भरपूर चारा नहीं मिल पा रहा है।

पक्षियों की संख्या घटने के कई अन्य कारण
पहले बड़ी तादाद में प्रवासी पक्षी डैम में आते थे, लेकिन अब जलवायु परिवर्तन के कारण पक्षियों की संख्या घट रही है। भोजन के कमी के चलते वह खुद को यहां असुरक्षित महसूस कर रहे हैं और जहां चारा अधिक है वहां शिकारी अवैध शिकार से बाज नहीं आ रहे हैं। एसएसबी का वाटर स्पोटर्स सेंटर भी पक्षियों के लिए बाधक बना हुआ है।
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कई एनजीओ करते रहे हैं गणना
शारदा डैम में पहले प्रवासी पक्षियों की संख्या करीब एक लाख के आसपास थी, लेकिन वर्ष 2001 में टरक्वाइज वाइल्ड लाइफ कंजर्वेशन सोसायटी ने जब गणना की तो उन्होंने 45 हजार प्रवासी पक्षी होने का खुलासा किया। वर्ष 2009 में की गणना में यह संख्या घटकर 11720 रह गई। इससे जुड़े लोग बताते हैं कि जो पक्षी यहां आ रहे हैं, उनमें प्रवासी पक्षियों की संख्या नाममात्र ही है । इसमें भारतीय पक्षी भी शामिल हैं, जो गर्मी के चलते यहां से अन्य जगहों पर चले जाते हैं।
यह सही है कि प्रवासी पक्षियों की संख्या घटी है। इसके जलवायु परिवर्तन मुख्य कारण है। इनकी पक्षियों की सुरक्षा के यहां कोई इंतजाम नहीं हैं। वन महकमा जंगल व जीवों की सुरक्षा तो कर लेता है, लेकिन यहां पक्षियों की सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं।
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टीएन खान, पर्यावरणविद्
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