विकलांगता अभिशाप नहीं है, यदि क्षमताओं का सही इस्तेमाल और कुछ करने का हौंसला हो तो कोई भी मुकाम मुश्किल नहीं है। ऐसा ही कुछ साबित कर दिखाया है शहर के नेत्रहीन खिलाड़ी कमल शर्मा ने। अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन की बदौलत कई देशों में भारत का झंडा बुलंद कर चुके अपने जिले के इस नेत्रहीन ‘लाल’ को उसकी उपलब्धि के लिए गुरुवार को विश्व विकलांग दिवस के मौके पर लखनऊ में सम्मानित भी किया गया।
शहर के बरहा रेलवे क्रासिंग के निकट स्थित जोशी कॉलोनी निवासी अध्यापक राममूर्ति शर्मा व लक्ष्मी देवी शर्मा के तीसरे नंबर का बेटे कमल जन्म से ही नेत्रहीन हैं। नेत्रहीन बेटे को लेकर प्रारंभ में माता पिता काफी चिंतित रहते थे, लेकिन नौ साल की अवस्था तक आते आते कमल ने अपनी खेल क्षमताओं से घर वालों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। बेटे की क्षमता को देख पिता ने उसे प्रोत्साहित किया। सबसे पहले उसने 2005 में ब्लाइंड क्रिकेट में प्रतिभाग किया। इसके बाद जूडो कराटे, शतरंज एवं अन्य खेलकूद प्रतियोगिताओं में भी रुचि दिखाई। 19 वर्ष के हो चुके अजय पिछले 10 वर्षों में स्टेट और नेशनल लेवल पर नाम रोशन करने के अलावा हंगरी, जर्मनी और रूस में जूडो कराटे का उत्कृष्ट प्रदर्शन कर अपने देश का नाम रोशन कर चुके हैं। वह अब तक 11 राष्ट्रीय और एक अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त कर चुका है।
दिसंबर 2013 में हंगरी में संपन्न जूडो प्रतियोगिता में अपने प्रदर्शन से वह न सिर्फ भारत के जूडो में एकलौते स्वर्ण पदक विजेता होने का गौरव प्राप्त किया बल्कि वह विश्व चैंपियन भी रहे। अक्तूबर में उसे जूडो कराटे की प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए जापान से निमंत्रण मिला था, लेकिन आर्थिक स्थिति ठीक न होने और सरकार से कोई सहायता न मिलने के कारण 45 हजार रुपये एकत्र नहीं कर सका। जिससे उसका जापान जाने का सपना पूरा नहीं हो सका। वर्तमान में कमल लखनऊ के डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय से बीए द्वितीय वर्ष की पढ़ाई कर रहा है। कमल की खेल प्रतिभा को देखते हुए गुरुवार को अंतर्राष्ट्रीय विकलांग दिवस पर विकलांग कल्याण मंत्री साहब सिंह सैनी ने उसे राज्य स्तरीय पुरस्कार से सम्मानित किया।