पीलीभीत। जिला पंचायत अध्यक्ष की पहली बार जिले में निर्विरोध ताजपोशी होगी। सपा के प्रत्याशी स्वामी प्रवक्तानंद के नाम वापस लेने के बाद यह मौका भाजपा को मिला है। ये भाजपा का दूसरा जिपं अध्यक्ष होगा, जोकि करीब 20 साल बाद बना है। इससे पहले भाजपा सिर्फ एक बार ही 1995 में अध्यक्ष पद पर जीत सकी थी। उस वक्त भी सत्ता भाजपा की थी, अब इस बार भी भाजपा सत्ता में है।
मंगलवार को हुए सियासी घमसान के बाद भाजपा प्रत्याशी डॉ. दलजीत कौर का निर्विरोध अध्यक्ष बनना तय हो चुका है। यह पहली बार होगा, जब जिला पंचायत में निर्विरोध अध्यक्ष बनेगा। इससे पहले 1995 में भी प्रदेश में भाजपा सरकार थी। उस समय भाजपा से अध्यक्ष पद के उम्मीदवार रहे बुद्धसेन वर्मा को अध्यक्ष चुना गया था। इसके बाद 2000 में भाजपा से बुद्धसेन वर्मा और निर्दलीय गुरुदयाल सिंह के बीच चुनाव हुआ था। इसमें गुरुदयाल सिंह के सिर जीत का सेहरा बंधा। फिर 2006 में बुद्धसेन वर्मा की पत्नी अनीता वर्मा ने भाजपा से चुनाव लड़ा था। जीत भी हुई, मगर 2007 में बसपा की प्रदेश में सरकार आने के बाद अनीता वर्मा ने कुर्सी गंवाने के डर से भाजपा छोड़ बसपा का दामन थाम लिया। इससे 2011 तक उनका कार्यकाल रहा। 2011 में अनीता वर्मा ने फिर बसपा से अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। 2012 में प्रदेश की सत्ता बदली और सपा के हाथों में चली गई। सत्ता बदलने के बाद सपा ने अध्यक्ष पद पर कब्जा करने के लिए अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया शुरू कर दी। इससे अनीता वर्मा को कुर्सी छोड़नी पड़ी। सपा के कद्दावर नेता रहे हाजी रियाज अहमद की पुत्री रुकैय्या आरिफ को अध्यक्ष बनाया गया था। 2016 में सपा से ही आरती महेंद्र को अध्यक्ष चुना गया। इसके बाद 2017 में प्रदेश में फिर भाजपा सरकार आई। मगर सपा के अध्यक्ष के खिलाफ कोई अविश्वास प्रस्ताव नहीं आया। 2021 में अब भाजपा के अध्यक्ष का निर्विरोध होना तय हुआ तो दूसरी बार भाजपा की ताजपोशी होगी। भाजपा से पहली बार अध्यक्ष बने बुद्धसेन वर्मा वर्तमान में सपा में जा चुके हैं।
भाजपा और सपा एक, सिर्फ दिया जा रहा धोखा
पीलीभीत। बसपा के मुख्य जोन कोऑर्डिनेटर रामसनेही गौतम ने कहा कि अध्यक्ष पद के लिए भाजपा औैर सपा की अंदरखाना एक है। यह सब नाटकीय ढंग से किया जा रहा है। इसी तरह नटकीय ढंग से मेरठ, कानपुर, शाहजहांपुर और गोरखपुर में भी सपा का उम्मीदवार नहीं है। सिर्फ भाजपा का है। मैनपुरी इटावा में भाजपा का नहीं बल्कि सपा का है। यह सब नटकीय ढंग से लोगों को दिखाने के लिए किया गया है। भाजपा के सामने सपा ने खुद को सरेंडर कर दिया।