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आज कैबिनेट मंत्री शिवपाल करेंगे नौगवां ओवरब्रिज का करेंगे शिलान्यास

Wed, 18 Nov 2015 10:33 PM IST
पीलीभीत।
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प्रदेश के लोक निर्माण, सिंचाई, सहकारिता मंत्री शिवपाल यादव बृहस्पतिवार 11 बजे माधोटांडा स्थित गोमती उद्गम स्थल पहुंचेंगे। यहां गोमती उद्गम व शारदा सागर का निरीक्षण कर अधिकारियों की बैठक करेंगे।
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इसके साथ ही शहर के नौगवां रेलवे क्रासिंग पर प्रस्तावित ओवरब्रिज का बाइफरकेशन गेस्ट हाउस में शिलापट का अनावर कर शिलान्यास करेंगे।

कैबिनेट मंत्री शिवपाल यादव के आने की सूचना मंगलवार दोपहर बाद प्रशासन को मिली थी जिस पर प्रशासन ने आनन फानन में गोमती उद्गम स्थल पर हेलीपेड बनवाकर व्यवस्थाएं कराना शुरू कर दिया लेकिन उनके आने की अधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी। बुधवार को दोपहर बाद जिला प्रशासन को उनके आने का कार्यक्रम प्राप्त हुआ।

इसके अनुसार कैबिनेट मंत्री लखनऊ से सुबह 10 बजे हेलीकाप्टर से चलकर 11 बजे माधोटांडा में गोमती उद्गम स्थल के निकट बनाए गए हेलीपेड पर पहुंचेंगे। यहां गोमती उद्गम स्थल का निरीक्षण करने के बाद कार से शारदा सागर डैम व बाइफरकेशन का निरीक्षण करेंगे। इसके बाद बाइफरकेशन गेस्ट हाउस में अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे।
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जिला प्रशासन के अनुसार बाइफरकेशन गेस्ट हाउस में ही शहर के नौगवां ओवरब्रिज के शिलापट का अनावरण कर सांकेतिक शिलान्यास करेंगे। कैबिनेट मंत्री का कार्यक्रम आने पर अधिकारियों ने तैयारियां तेज कर दी हैं। गोमती उद्गम स्थल, शारदा सागर डैम, बाइफरकेशन आदि में पुलिस फोर्स तैनात कर दिया गया है।
गोमती को आज भी है एक भागीरथ का इंतजार
माधोटांडा। अवध नगरी को अपना पावन स्पर्श कराने वाली गोमती नदी में अविरल धारा बहाने को पर्यावरणविद समेत तमाम संगठनों ने जागरूकता अभियान चलाए, लेकिन सरकारों की नियत में खोट के चलते उद्गम स्थल से लेकर लखनऊ तक पानी देने का बने तमाम प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में जाते रहे। लोगों को उम्मीद हैं कि कबीना मंत्री के उड़नखटोले के उतरने की तैयारी से क्षेत्र के लोगों को फिर एक आस बंधी है।
किसानों ने ही मिटा दिया गोमती का वजूद
गोमती नदी का उद्गम स्थल माधोटांडा स्थित फुल्हर झील है। उपेक्षा के चलते उद्गम स्थल लेकर जनपद सीमा तक गोमती का वजूद ही गांवों के किसानों ने मिटा दिया। किसानों ने गोमती के सूखने पर उसके रकबे में खेती करनी शुरू कर दी और सांठगांठ कर उक्त जमीन अभिलेखों में अपने नाम दर्ज करा ली। इसका खुलासा तत्कालीन डीएम कौशलराज शर्मा के समय में रिकार्ड खंगालने के बाद सामने आया था।
अविरल धारा बहाने को चलते रहे अभियान
बसपा सरकार के कार्यकाल में गोमती संरक्षण अभियान चला। अभियान को ठोस अमलीजामा पहनाने को उद्गम स्थल से लेकर 960 किमी लंबी यात्रा तय की गई। जिसमें तमाम पर्यावरणविद्, स्वामी प्रज्ञानंद, गंगा महासभा के आचार्य जितेंद्र सहित तमाम सेवानिवृत अभियंता शामिल हुए थे।
सरकार की नींद खुली, लेकिन हालात जस के तस
जागरूकता अभियानों के बाद बसपा कार्यकाल में दो प्रोजेक्टों को मंजूरी दी गई। पहला प्रोजेक्ट 5.5 करोड़ का, जिसमें हरदोई ब्रांच से लेकर उदगम स्थल तक सौ क्यूसेक पानी पहुंचाना था जबकि दूसरा 15.50 करोड़ की लागत का था।
समें उद्गम स्थल से लेकर पीलीभीत सीमा तक खुदाई की जानी थी। यह कार्य बाढ़ खंड को दिया गया, बाद में कुछ कार्य ग्राम पंचायतों को दे दिए गए। कैबिनेट सचिव शशांक शेखर सिंचाई विभाग के अफसरों के साथ उद्गम स्थल भी आए थे, लेकिन अधिकारियों की निष्क्रियता के चलते अविरल धारा बहाने का मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
सपा कार्यकाल में भी कागजों में बने प्रोजेक्ट
सिंचाई विभाग के आला अफसरों ने सौ क्यूसेक पानी देने को उस दौरान तो हाथ खींच लिए, लेकिन बाद में राजनीतिक दबाव के कारण 45 करोड़ का प्रोजेक्ट बनाया, लेकिन धनराशि अधिक होने पर मामला ठंडे बस्ते में चला गया। एक अन्य सात करोड़ का प्रोजेक्ट बनाया, लेकिन उसके सर्वे व ड्राइंग बनाने को बजट नहीं मिल सका।
ताकतवर कबीना मंत्री के आने से फिर बढ़ी उम्मीदें
हरदोई ब्रांच से उद्गम स्थल तक स्वच्छ पानी दिया जाना है। प्रदेश के सिंचाई मंत्री शिवपाल सिंह के आने की संभावना पास ही सिंचाई विभाग भी है। ऐसे में विभागीय सूत्रों का मानना है कि यदि हरदोई ब्रांच पर रेग्यूलेटर लगाकर माधोटांडा रजवाहा के माध्यम से सौ क्यूसेक पानी देने के आदेश हो गए तो यह पानी अवधनगरी तक की शोभा बढ़ा सकता है।
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यह प्रोजेक्ट नहीं आए अस्तित्व में
 - हरदोई ब्रांच से लेकर उदगम स्थल तक सौ क्यूसेक पानी पहुंचाना - लागत 5.5 करोड़।
- उद्गम स्थल से लेकर पीलीभीत सीमा तक खुदाई - लागत 15.50 करोड़।
- माधोटांडा रजवाह के हेड से 25 किमी तक व पूरनपुर में हेड से 16 किमी नहर पटरियों को पक्का करना - लागत 45 करोड़।
- माधोटांडा रजवाह के हेड से 2.700 किमी तक दोनों किनारों को पक्का करना - लागत 7.00 करोड़।
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