मोहल्ला पंजबियान निवासी नासिर शम्सी की परेशानियां कम नहीं हैं। पत्नी की
बीमारी में धंधा चौपट होने से वह एक-एक रुपये से मोहताज है। इधर-उधर से
रुपये उधार लेकर बच्चों की फीस भरी। पैसे की परेशानी ऊपर से सूदखोर का
तकादा व अभद्र व्यवहार से परेशान होकर ही उसकी पत्नी हीना ने तीन बच्चों के
साथ रविवार को चूहे मार दवा (जहर) खा ली थी। फिर भी जिंदगी मौत से जूझ रहे
परिवार के बयान लेने कोई अफसर जिला अस्पताल नहीं पहुंचा। अमर उजाला में
छपी खबर का संज्ञान लेकर डीआईजी बरेली कंट्रोल ने जब एसपी से मामले की
जानकारी की तब कोतवाली पुलिस का एक दरोगा बयान लेने सोमवार सुबह पीड़ित के
घर गया। वहीं आरोपी कमेटी संचालक से बात करने की कोशिश की गई तो उसने कुछ
भी कहने से इंकार कर दिया।
नासिर के चार बच्चे हैं। वह कई साल से फेरी
लगाकर गांवों में बिंदी आदि बेचकर परिवार चलाता है। नासिर ने बताया कि
मोहल्ले के ही एक बैटरी कारोबारी द्वारा चलाई जा रही कमेटी से वह चार साल
से लेन-देन करता रहा है। दो साल पहले पत्नी माइग्रेन की बीमारी से पीड़ित
हुई तो सारी पूंजी बीमारी में लग गई। इस वजह से धंधा चौपट हो गया और कमेटी
का एक लाख बकाया हो गया।
उन्होंने बताया की चारों बच्चे पढ़ते हैं। फीस
जमा न होने के कारण स्कूल वालों ने परीक्षा में बिठाने से इंकार कर दिया
था। इस उसने इधर-उधर से पैसे का इंतजाम कर फीस जमा की थी। वहीं बकाया अदा न
करने पर कमेटी संचालक रोज तकादा करने लगा। उसके बहनोई अफसार अहमद की कमेटी
ने रुपये भी रोक लिए। शनिवार को भी घर पर आकर संचालक ने धमकी दी और बच्चों
से अभद्रता की। इससे क्षुब्ध पत्नी ने तीन बच्चों के साथ घर में रखी
चूहेमार दवाई खाकर आत्मघाती कदम उठा लिया था।
उधर जब तक यह परिवार जिला
अस्पताल में भर्ती रहा तब तक सूचना के बाद भी कोई पुलिस या अन्य अफसर बयान
लेने नहीं पहुंचा। सोमवार को अमर उजाला में छपी इसकी खबर का संज्ञान ले जब
डीआईजी बरेली कंट्रोल ने एसपी से जानकारी की तब कोतवाली पुलिस के कान पर
जूं रेंगी।
सोमवार को दरोगा वीके शर्मा पीड़ित के घर पहुंचे और घटना के
बाबत पूछताछ की। शहर कोतवाल अतुल प्रधान ने बताया कि नियमानुसार मेमो की
सूचना तहसीलदार को भेज दी गई थी। पीड़ित से तहरीर मांगी गई है, लेकिन तहरीर
नहीं मिली है। तहरीर मिलने पर रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।
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दरोगा
को पीड़ित के घर भेजकर मामले की जानकारी कराई गई है। आरोपी कमेटी संचालक
के पास लाइसेंस है या नहीं आदि की जांच कराकर वह कार्रवाई के लिए रिपोर्ट
प्रशासन को भेजेंगे। तहरीर मिलने पर रिपोर्ट दर्ज की जाएगी।
- एसपी शाही, एसपी
बिना लाइसेंस चलता है ‘धंधा’
पीलीभीत।
शहर में ही नहीं जिले भर के लगभग हर कसबे में कुछ लोग कम से कम 20 सदस्यों
की आपसी सहमति से कमेटी बना कर बिना लाइसेंस के लेन-देन का धंधा कर रहे
हैं।
बता दें कि कमेटी में हर सदस्य निर्धारित रुपये प्रतिदिन अथवा
मासिक जमा करता है। इसके बाद महीने के अंत में सदस्यों से जमा पैसे की बोली
लगाई जाती है। उदाहरण के तौर पर यदि महीने में 50 हजार रुपये जमा हुए और
बोली 40 हजार पर छूटी तो जिस सदस्य के पक्ष में बोली छूटेगी उसे 40 हजार
रुपये दे दिए जाएंगे। बाद में कमेटी से पैसा लेने वाले व्यक्ति की हर महीने
किश्त बांध दी जाती है।
किस्त टूटने पर पेनाल्टी के रूप में कहीं-कहीं
आठ प्रतिशत के हिसाब से ब्याज कमेटी वाले को देना पड़ता है। यह गोरख धंधा
बिना लाइसेंस के चल रहा है। आमतौर पर इस कमेटी में करीब 20 सदस्य होते हैं
इस लिए इसे कुछ स्थानों पर ‘बीसी’ भी कहते हैं। इस गोरखधंधे पर न पुलिस
अंकुश लगा पा रही है न ही प्रशासन।
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साहूकारी का काम करने को
लाइसेंस होता है। यदि बिना लाइसेंस कोई कार्य करता है तो कार्रवाई की
जाएगी। कमेटी का कार्य भी अवैध है। ऐसे मामलों की जांच कराई जाएगी। दोषी
पाए जाने वालों पर कार्रवाई होगी।
- आलोक सिंह, एडीएम