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अमर उजाला लाइव- ठेका सफाई कर्मचारी हड़ताल पर, सड़कों पर गंदगी के ढेर

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पीलीभीत। शहर की सफाई व्यवस्था पहले से ही किसी से छिपी नहीं है। मगर, कई माह से मानदेय न मिलने से आउटसोर्सिंग वाले सफाई कर्मचारी बृहस्पतिवार से हड़ताल पर चले गए। इससे शहर के मुख्य बाजारों से लेकर गली, मोहल्लों में कूड़े और गंदगी के ढेर लग गए। नगरपालिका ने इनकी जगह पर स्थायी कर्मचारियों से सफाई का काम लेने की वैकल्पिक व्यवस्था करने के दावे किए हैं, मगर यह संभव नहीं है। वहीं स्वच्छता सर्वेक्षण में अच्छे अंक हासिल करने की उम्मीदें धराशायी हो सकती हैं।
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ठेका कर्मचारियों ने कहा है कि वे तब तक हड़ताल पर रहेंगे, जब तक उन्हें उनका मानदेय नहीं मिल जाता। इससे शहरवासियों को कुछ दिन तक गंदगी से निजात मिलती नहीं दिख रही। कारण यह है कि हड़ताल पर गए ठेके वाले कर्मचारियों की 206 है, ऐसे में स्थायी 183 कर्मचारियों से उनका काम पूरा कराना आसान नहीं है। शहर में आबादी ढाई लाख है। कुल 27 वार्ड डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन के लिए 25 सफाई कर्मी अलग से लगाए गए हैं, मगर सड़कों के किनारे से कूड़ा उठना मुश्किल होगा।
अमर उजाला की टीम ने बृहस्पतिवार को शहर के मुख्य इलाकों में भ्रमण कर सफाई व्यवस्था की हकीकत परखी तो इसमें नगरपालिका के दावे के विपरीत तस्वीर कुछ और ही दिखी। स्टेशन रोड पर राजाबाग कालोनी के समीप कूड़े का ढेर लगा मिला। मुख्य मार्ग टनकपुर हाईवे पर मौर्य मार्केट के समीप गंदगी का ढेर लगा था। जीजीआईसी कॉलेज के पास ही रोजाना कूड़ा का ढेर लगा मिला। मोहल्ला मोहम्मद फारूख में बिट्टू जरनल स्टोर के पास ही कूड़ा ढेर लगा था। मोहल्ला बेनी चौधरी में शिव मंदिर के पास खाली पड़े ग्राउंड को ही डलावघर बना दिया गया। यहां पूरे शहर का कूड़ा एकत्र करने के बाद ट्रैक्टर-ट्राली और टेंपो से ढेर लगा दिया गया है। इससे आसपास रहने वाले लोगों का सांस लेना दूभर हो रहा था।
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शहर में स्टेशन रोड, सुनगढ़ी थाना तिराहा और मुधवन कॉलोनी के पास कूड़े का ढेर लगा रहता है। दोपहर बाद से शहर में कूड़ा उठाया जाता है। इन रास्तो से गुजरने वालों के साथ वह रहने वाले लोगों को दुर्गंध झेलना पड़ती है। स्मार्ट सिटी बनाने के लिए पहले तो कूड़े का निस्तारण कराया जाना चाहिए। -त्रिलोचन सिंह, निवासी छतरी चौराहा
शहर में साफ सफाई के लिए ठेके पर पालिका में रखे कर्मचारियों को बीते पांच माह का वेतन न मिलने पर बृहस्पतिवार को सफाई कार्य बंद कर हड़ताल पर चले गए। ठेका सफाई कर्मचारियों ने एकत्र होकर सुबह आफिसर्स कॉलोनी में पहुंचकर एडीएम न्यायिक देवेंद्र प्रताप सिंह को ज्ञापन सौंपा। इसमें कर्मचारियों ने बताया कि पालिका की ओर से उन्हें वर्दी उपलब्ध नही कराई गई है। न ही वर्ष 2011 से पीपीएफ का भुगतान कराया गया है। उन्हेें 302 रुपये के स्थान 228 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से भुगतान किया जाता है। ठेके कर्मचारियों ने मांग पूरी न होने तक सफाई कार्य ठप करने का एलान किया है। नगरपालिका के पास 183 स्थायी कर्मचारी हैं, जो शहर की सफाई के लिए पर्याप्त नहीं हैं। नगरपालिका इनको ही ठेका कर्मचारियों का विकल्प मान रही है। अभी तक ठेका कर्मचारियों से बातचीत कर बीच का रास्ता निकालने के प्रयास नहीं शुरू किए गए।
ठेका कर्मचारियों के वेतन के लिए ठेकेदार से वार्ता की गई है। उन्हें वेतन देकर हड़ताल खत्म कराने के प्रयास चल रहे हैं। जब तक हड़ताल पर हैं, तब तक स्थाई कर्मचारी काम करेंगे। सफाई व्यवस्था की निगरानी करने के लिए वाहनों में जीपीएस लगवाया गया है। जनता के सहयोग से शहर स्मार्ट सिटी जरूर बनेगा। - विमला जायसवाल, चेयरमैन, नगर पालिका परिषद,
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