पीलीभीत। शासन द्वारा के अमरिया और कलीनगर को तहसील का दर्जा तो दे दिया गया, लेकिन अभी तक इन दोनों तहसीलें अस्थाई रूप से अन्य विभागों केे भवनों में संचालित हो रही हैं। यहां के क्षेत्रवासियों को उम्मीद थी कि अब उनकी समस्याओं का उनके ही क्षेत्र में निस्तारण हो जाया करेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अधिकांश अफसरों और कर्मचारियों के मुख्यालय पर न रहने से जनता को इसका कोई खासा लाभ नहीं मिल पा रहा है।
अमरिया तहसील को बने ढाई वर्ष से भी अधिक समय बीत चुका है। तहसील बनने के बाद पहली एसडीएम के रूप में पुष्पा देवरार की नियुक्ति की गई। अमरिया तहसील में अब तक चार एसडीएम बदले जा चुके हैं, लेकिन अभी तक तहसील भवन निर्माण के लिए जमीन भी तय नहीं हुई है। पिछले ढाई वर्ष से तहसील का कार्य कैनाल विभाग की कोठी में चल रहा है। तहसील दिवस में जिला स्तर के अधिकारियों की मौजूदगी से क्षेत्र की जनता की काफी समस्याओं का समाधान हो रहा है। पहले जमीन से संबंधित मामले, राशन कार्ड, आय प्रमाण पत्र, जन्म प्रमाण पत्र, मृत्यु प्रमाण पत्र, निवास व स्थाई प्रमाण पत्र के लिए पीलीभीत जाना पड़ता था। तहसील बनने से लेखपाल तहसील पर आसानी से मिल जाते हैं। जमीन से संबंधित मुकदमों की सुनवाई और निस्तारण भी हो जाते हैं, लेकिन रजिस्ट्री आफिस न होने के कारण रजिस्ट्री कराने के लिए पीलीभीत जाना होता है।
कलीनगर नगर पंचायत कलीनगर को 13 दिसंबर 2016 को तहसील का दर्जा दिया गया था। इसके बाद करीब 170 गांव काटकर नई तहसील में जोड़े गए। तहसील के लिए नगर पंचायत में पांच एकड़ जमीन भी चिह्नित की गई। फिलहाल वर्तमान में नगर पंचायत के कार्यालय में अस्थाई रूप से तहसील को संचालित किया जा रहा है। इसमें दो छोटे-छोटे कमरों में एसडीएम और तहसीलदार के बैठने की व्यवस्था है। भवन निर्माण को प्रशासन की ओर से बजट मंजूरी को प्रस्ताव भी भेजा गया, लेकिन लंबा समय बीतने के बाद भी बजट मंजूर नहीं हो सका।
हालांकि तहसील बनने के बाद क्षेत्रीय जनता में उम्मीद जागी थी कि अब क्षेत्र का विकास होगा, अफसर समय से मिलेंगे और समस्याओं का निस्तारण हो सकेगा, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। इधर तहसील की व्यवस्थाओं की बात करें तो यहां ना तो एसडीएम कार्यालय है और ना ही तहसीलदार कार्यालय। इसके अलावा राजस्व लिपिक, कलेक्शन कार्यालय और रजिस्ट्रार कार्यालय भी नहीं है। नगर पंचायत के भवन में छोटे-छोटे कमरों में तहसील को चलाया जा रहा है। राजस्व मामलों की सुनवाई के लिए भी एसडीएम और तहसीलदार न्यायालय भी नहीं है। मात्र तहसील के नाम मात्र औपचारिकता ही निभाई जा रही है। एसडीएम हरिओम शर्मा ने बताया कि भवन निर्माण के लिए बजट को लेकर कोई आदेश नहीं हुआ।
कलीनगर और अमरिया तहसील के भवन निर्माण के प्रस्ताव बनाकर शासन को पूर्व में ही भेजा जा चुके हैं। इस मामले में शासन से जल्द अनुमति मिलने की उम्मीद है।
वैभव श्रीवास्तव, डीएम