जिले भर में नागपंचमी का त्योहार परंपरागत ढंग से मनाया गया। श्रद्धालुओं
ने मंदिरों, खेतों व मठों पर पहुंचकर दूध चढ़ाकर पूजा अर्चना की। इस मौके
पर सपेरों ने मोहल्लों में घूमकर लोगों को नाग देवता के दर्शन कराए।
शहर
में बुधवार सुबह से ही श्रद्धालुओं का मंदिरों पर पहुंचने का सिलसिला शुरू
हो गया। श्रद्धालुओं ने मंदिरों में पहुंचकर पूजा अर्चना की। मंदिरों से
लौटने के बाद शेष बचे दूध को घरों में छिड़ककर मनौती मांगी। वहीं ग्रामीण
अंचलों में अधिकांश घरों में गोबर के सांप बनाकर विधिवत ढंग से पूजा अर्चना
की गई।
पूरनपुर। नगर सहित क्षेत्र में नागपंचमी का पर्व परंपरागत ढंग
से मनाया गया। श्रद्धालुओं ने शिव मंदिरों में पहुंचकर दूध चढ़ाया। घरों
में नाग देवता की पूजा अर्चना की। कुर्रैया में नागपंचमी पर मेला लगा। मेला
में तमाम खान-पान आदि की दुकानें लगी। दंगल प्रतियोगिता भी हुई। इसमें कई
कुश्ती हुई।
अमरैयाकलां। गांव के देवीस्थान मंदिर में मेला लगा।
बैगियों ने साल के सर्पदंश पीड़ितों के बंध काटे। दंगल प्रतियोगिता में कई
कुश्ती हुई।
बीसलपुर। नगर समेत पूरे तहसील क्षेत्र में नाग पंचमी पर्व
धूमधाम से मनाया गया। श्रद्धालुओं ने घरों की दीवारों पर गोबर से बनाई नाग
की आकृतियों की पूजा अर्चना की व दूध चढ़ाया। श्रद्धालुओं ने घरों के सभी
हिस्सों में दूध छिड़का। इस पर्व के सिलसिले में सपेरे सांपों को लेकर गली
गली घूमते देखे गए। सर्पदंश का इलाज करने वाले लोगों ने पीड़ितों के बंध
काटे। गांव बौनी में यह कार्यक्रम दिन भर चलता रहा। मोहल्ला दुबे में
श्यामल दास की मढ़ी नाग पंचमी मेला भी लगा, जहां तरह तरह की दुकानें और खेल
तमाशे सजाए गए थे।
चुर्रासकतपुर। कस्बा समेत पूरे क्षेत्र में श्रद्धालुओं ने शिवालयों और पीपल के पेड़ों पर दूध चढ़ाया।
बिलसंडा।
नगर एवं क्षेत्र में नागपंचमी पर्व परंपरागत ढंग से मनाया गया। नगर के
मोहल्ला देवीस्थान स्थित दुर्गा मंदिर परिसर में मेला लगा। लोगों ने
परंपरागत तरीके से सर्पों को दूध पिलाया और खुशहाली की कामना की। उधर
ग्रामीण अंचल में भी मेले के आयोजन हुए जहां पर सर्प से काटे हुए लोगों की
बैगियों ने झाड़फूंक की। उधर ढोला समेत कई मनोरंजक कार्यक्रम भी हुए।
बमरोली।
नागपंचमी के पावन पर्व पर कस्बे के प्रसिद्ध हनुमान मंदिर परिसर में मेला
लगा। जिसमें लोगों की खासी भीड़ जुटी। लोगों ने मेले में लगी दुकानों से
जमकर खरीदारी की। देर शाम तक चलने वाले मेले में लगे झूले का भी लोगों ने
लुत्फ लिया और रात्रि में ढोला का प्रोग्राम देखा।