पूरनपुर। चावल की कुटाई 10 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 250 रुपये प्रति क्विंटल न करने, 67 किलोग्राम प्रति क्विंटल की जगह 60 किलोग्राम चावल की रिकवरी न होने पर कारोबार न करने की चेतावनी देने वाले राइस मिल मालिक बैकफुट पर आ गए। अधिकतर राइस मिल मालिकों ने कारोबार शुरू कर दिया। साथ ही सरकारी खरीद केंद्रों से धान लेने का एग्रीमेंट भी करा लिया।
राइस मिल मालिकों की 26 सितंबर को नगर के एक होटल में बैठक हुई थी। बैठक में धान खरीद केंद्रों को दिए जाने वाले चावल की कुटाई काफी कम होने पर चावल की रिकवरी 67 प्रतिशत लेने पर रोष व्यक्त किया गया था। कहा गया था कि कुटाई की दर चालीस साल पुरानी है। तब से महंगाई कई गुना बढ़ गई है। चावल कुटाई 67 प्रतिशत है। जबकि अब हाइब्रिड धान की बढ़ती खेती पर रिकवरी 60 प्रतिशत आ रही है। ऐसे में उनको भारी नुकसान हो रहा है। लंबे समय से मांग करने के बाद भी उनकी समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। बैठक में धान की कुटाई 10 रुपये से बढ़ाकर 250 रुपये प्रति क्विंटल की जाए और चावल की रिकवरी 67 किलोग्राम प्रति क्विंटल से कम कर 60 किलोग्राम होने। साथ ही मांग पूरी न होने पर कारोबार न करने की चेतावनी दी थी। इसके अलावा धान खरीद सरकारी एजेंसियों की बजाय राइस मिल और आढ़तियों से कराने की मांग की गई थी। धान कुटाई की सालों से बकाया धनराशि का भुगतान कराने की मांग कर समस्याओं का समाधान न होने पर राइस मिलों की चाबियां प्रशासन को सौंपने का निर्णय लिया गया था। इसके बाद अधिकांश राइस मिल मालिकों ने कई दिन तक धान की खरीद नहीं की। समस्याओं का समाधान न होने पर राइस मिल मालिक अब बैकफुट पर आ गए। अधिकांश राइस मिल मालिकों ने अपना कारोबार शुरू कर दिया। खरीद केंद्रों से धान कुटाई के लिए लेने का एग्रीमेंट भी करा लिया।
राइस मिल मालिक व्यापार कर फायदे में नहीं है। इसको लेकर सरकार, अफसरों से समस्याओं के समाधान की मांग की गई थी। मगर समस्याओं का समाधान नहीं हो सका। करोड़ों रुपये लगाकर कब तक व्यापार को बंद किया जा सकता है। मजबूरन राइस मिल मालिकों ने कारोबार शुरू किया है। कुछ लोगों ने जीओ टैगिंग भी कराई है। समस्याओं के समाधान को लेकर प्रयास जारी रहेगा।
- सुखदेव सिंह, अध्यक्ष, राइस मिलर्स एसोसिएशन