फर्म के कागजात से लेकर खातों की जुटाई जा रही जानकारी
डीएम के निर्देश पर चल रही है मनरेगा के कामों की जांच, दो फर्म रडार पर
पीलीभीत। मनरेगा में करोड़ों रुपये के घोटाले के शक में दो फर्मों को लेकर चल रही जांच में एक बड़ा साक्ष्य अफसरों को मिला है। एक फर्म को हुए लेनदेन का हिसाब निकलवाया गया तो अफसर भी दंग रह गए। तीन साल के भीतर फर्म को साढ़े तीन करोड़ से अधिक का भुगतान किया जा चुका है। फर्म एक कर्मचारी की बताई जा रही है। ऐसे मेें शिकंजा कसने को फर्म से जुड़े कागजात जुटाने का प्रयास किया जा रहा है। बैंक खाते भी खंगाले जाएंगे। फिलहाल अफसर कागजात मिलने के बाद ही तस्वीर साफ होने की बात कह रहे हैं।
अमरिया के एपीओ अजय कुमार ने फर्म और फर्जी मस्टररोल बनाकर मनरेगा में करोड़ों का घोटाला किया था। अगस्त में शासन के निर्देश पर एपीओ और तीन रोजगार सेवकों को जेल भेजा गया था। डीएम पुलकित खरे के निर्देश पर जनपद में मनरेगा के तहत कराए गए कामों की जांच शुरू कराई गई थी। माधोटांडा के एक रोजगार सेवक और पूरनपुर क्षेत्र के एक तकनीकि सहायक के परिवार की नाम से फर्म चलाकर घोटाले की बात अफसरों तक पहुंची। इस पर दो फर्मों की जांच कराई जा रही है। इसी बीच एक फर्म को हुए लेनदेन का ब्योरा जुटाया गया। साल 2018 में फर्म को करीब 2.35 करोड़, 2019 में 87 लाख और 2020 में अब तक 34 लाख रुपये का भुगतान किया जा चुका है। इसका लेखाजोखा जांच कर रहे डीडीओ जुटा चुके हैं। मगर अब तक फर्म से जुड़े आवश्यक कागजात और अन्य तमाम अभिलेख मुहैया नहीं कराए गए है, जिसे लेकर पत्राचार ब्लॉक स्तर पर किया जा रहा। मगर कहीं न कहीं घोटाले का शक अधिकारियों को भी है। कार्रवाई के लिए सिर्फ अभिलेख मिलने का इंतजार किया जा रहा है। इसके अलावा भी कई बिंदुओं पर छानबीन चल रही है।
मनरेगा के कामों की जांच चल रही है। संदेह पर फर्म को हुए भुगतान का ब्योरा निकलवाया गया था। जांच पूरी होने के बाद तस्वीर स्पष्ट कर दी जाएगी।
- योगेंद्र कुमार पाठक, डीडीओ