बंद पड़ी लिफ्ट के आगे बैठे लोग। संवाद
पीलीभीत। मातृ-शिशु चिकित्सालय (एमसीएच) में सुविधाओं के बजाय गर्भवती और प्रसूताओं को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। सीएमएस, सीएमओ और डीएफओ के लिफ्ट में फंसने के 20 दिन बाद भी अस्पताल के जिम्मेदार हालात नहीं बदल सके। 20 दिन बाद भी गर्भवती व प्रसूताएं रैंप के सहारे इलाज कराने जाने-आने के लिए मजबूर हैं। वहीं अस्पताल के अधीक्षक व्यवस्थाओं पर खुद को जिम्मेदार न होना बता रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज के अधीन संचालित जिला महिला अस्पताल में लगी लिफ्ट पांच वर्ष में पांच दिन भी ठीक तरह से नहीं चल सकी है। दो जुलाई को पौधरोपण कार्यक्रम में पहुंचे डीएफओ भरत कुमार, सीएमओ डॉ. आलोक कुमार व सीएमएस एमसीएच विंग करीब दस मिनट तक लिफ्ट में फंसे रहे थे। इसके बाद जिम्मेदारों ने लिफ्ट की मरम्मत और ट्रायल की बात कही।
शुरूआत में तो दिखावे के लिए लिफ्ट दुरुस्त करने का का कार्य चला, लेकिन 20 दिन बाद भी लिफ्ट का संचालन नहीं हो सका है। गर्भवती और प्रसूताएं रैंप के सहारे हांफते हुए चिकित्सक के पास पहुंच रहीं हैं। जांच, भर्ती और ऑपरेशन के लिए रोजाना तीसरी मंजिल तक रैंप के सहारे चढ़ना पड़ रहा है।
बंद पड़ी लिफ्ट के आगे बैठे लोग। संवाद
बंद पड़ी लिफ्ट के आगे बैठे लोग। संवाद