रसूल-ए-पाक के रौजे की जियारत करने के बाद यहां पहुंचे खलीफा-ए-मुफ्ती-ए-आजमे हिंद अलहाज कारी अमानत रसूल का तमाम लोगों ने खैरमकदम किया। इस मौके पर उनके आवास पर महफिले मक्का मदनी का आयोजन किया गया। इसे खिताब करते हुए कारी अमानत रसूल ने कहा कि हदीस से साबित है कि रसूले पाक से मोहब्बत करने वालों का रोजे महशर में हिसाब आसान होगा। उन्होंने कहा कि जिंदगी में हज और उमरा की सआदत हासिल करने की सभी आशिकाने रसूल को कोशिश करनी चाहिए।
अमानत रसूल के 11वीं बार, बेटे हाजी रजाए रसूल के छठी बार, भाई इनायत रसूल के पांचवी और 105 साल की उनकी वालिदा के चौथी बार हज और उमरा का शर्फ हासिल करने पर हुए जश्न में हाजी रजाए रसूल ने बताया कि मदीना मुनव्वरा में 14 दिन के कयाम के दौरान कारी साहब ने 14 मदनी कलाम कहने का भी शर्फ हासिल किया। उन्होंने कारी साहब के ताजा नातिया कलाम पेश कर सामइन को मदनी फिजाओं का एहसास कराया। फातहे छत्तीसगढ़ मौलाना अहमद रजा मंजरी ने मदीना मुनव्वरा की फजीलत बयान की। उनकी तकरीर पर सामइन झूम उठे। मौलाना मोहम्मद अनीस, मुफ्ती अनीसउर्रहमान, मौलाना मोहम्मद कासिम मिस्बाही, मौलाना रजब अली ने भी कलाम पेश किए। अंत में दुरुदो सलाम के बाद फातेहा ख्वानी की गई। सभी को मदनी लंगर करवाया गया और मदीना शरीफ से लाए गए तबर्रुक से भी नवाजा गया। मदनी महफिल में हाजी मो. जफर शम्शी, अब्दुल जाहिद अंसारी, मोहम्मद इस्लाम, मुजीब साहिल, फुरकान हाशमी, हाजी तस्लीम शम्सी, दौलत खां, शहीद हुसैन समेत तमाम लोग मौजूद रहे।