- जिला क्षय रोग अस्पताल को मिली एबीनॉट मशीन
- केंद्र सरकार ने 38 जिलों को दी सौगात
- अभी तक बरेली भेजे जाते थे क्षय रोगी
जिले में अब एमडीआर (मल्टी ड्रग रसिस्टेंस) मरीजों की सांसें जांच के अभाव में नहीं टूट सकेगी। केंद्र सरकार ने जनपद समेत प्रदेश के अन्य 38 जिलों को एबीनॉट मशीन मुहैय्या कराई है। इसके माध्यम से मरीजों की जांच कर उनके एमडीआर होने का पता लगाया जा सकेगा। अभी तक जिले के क्षय रोगियों को जांच के लिए बरेली भेजा जाता था।
जिले में हर साल टीबी के करीब दो हजार मरीज डाट्स प्रोग्राम के तहत रजिस्ट्रेशन कराते हैं। इसमें कई ऐसे मरीज होते हैं तो बीच में दवा छोड़ देते हैं। डॉक्टरों के मुताबिक यदि कोई मरीज डाट्स कोर्स को बीच छोड़ देता है तो टीबी की दवाएं उस पर असर नहीं करती। ऐसे मरीज को एमडीआर के रूप में चिंहित किया जाता है। जिला क्षय रोग अस्पताल द्वारा एमडीआर की जांच के लिए मरीजों को बरेली भेजा जाता है। वर्तमान में जिले में करीब 61 एमडीआर मरीज चिंहित किए जा चुके हैं।
उधर, स्वास्थ्य मंत्रालय ने राष्ट्रीय क्षय नियंत्रण कार्यक्रम के तहत जिला क्षय रोग अस्पताल को एबीनॉट (कार्टिज बेस्ड न्यूक्लिक एसिड एम्लीफिकेशन टेस्टिंग) मशीन मुहैय्या कराई है। यूएसए से आयतित इस मशीन के जरिए महज 1.45 मिनट में व्यक्ति के एमडीआर होने का पता लगाया जा सकेगा। जिला क्षय रोग अस्पताल में पहुंचने वाले मरीजों को यह जांच की सुविधा नि:शुल्क मिल सकेगी, जबकि प्राइवेट स्तर पर इसकी जांच करीब बीस हजार रुपये में होती है। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. राजेश भट्ट ने बताया कि एबीनॉट मशीन अस्पताल को मिल चुकी है। एमडीआर जांच की सुविधा जिले में मिल सकेगी। शीघ्र ही इसे स्थापित किया जाएगा।