राज्य महिला आयोग की
सदस्य असमा सिद्दीकी मुख्य रूप से महिला उत्पीड़न से जुड़े मामलों की जन
सुनवाई के लिए यहां आईं थीं, लेकिन यहां प्रशासन ने उन्हें ‘जन’ से दूर
रखा। महिला उत्पीड़न के मामलों में पुलिस की पोल पट्टी न खुल जाए लिहाजा
पुलिस प्रशासन ने आयोग की सदस्य के सामने परिवार परामर्श केंद्र पर पहले से
चल रहे वादों में उपस्थित वादकारी महिलाओं में से कुछ को पुलिस लाइन से
अपने वाहन से लाकर गेस्ट हाउस में मौजूद आयोग की सदस्य के सामने पेश कर
अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ली। अमर उजाला द्वारा आयोग की सदस्य का ध्यान
जब ‘जन’ के नदारद रहने की ओर खींचा गया तो उन्होंने भी इसे स्वीकार करते
हुए अगली सुनवाई की जगह कलक्ट्रेट अथवा पुलिस लाइन में रखने के निर्देश
मौजूद अधिकारियों को दिए।
आयोग की सदस्य असमा सिद्दीकी के इस जन सुनवाई
का कार्यक्रम करीब पांच दिन पहले ही जिला प्रशासन को प्राप्त हो गया था।
आयोग की टीम को सब कुछ ‘ओके’ दिखे इसका खाका खींच लिया। टीम के सामने अधिक
लोग न पहुंच सके इसके लिए पुलिस प्रशासन ने अपनी तरफ से इसका किसी तरह का
कोई प्रचार, प्रसार नहीं कराया। सूचना विभाग ने भी मंगलवार को इस सूचना की
विज्ञप्ति जारी कर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ली। आम दिनों में महिला
फरियादी कलक्ट्रेट अथवा पुलिस लाइन में अपना दुखड़ा सुनाने जाती हैं, लेकिन
इस जन सुनवाई के लिए अधिकारियों ने शहर के एक छोर पर स्थित लोक निर्माण
विभाग अतिथि गृह का स्थल निर्धारित किया।
आयोग की सदस्य ठीक 11 बजे
सुनवाई के लिए बैठ गईं, लेकिन तब तक वहां एक भी महिला फरियादी नहीं पहुंची
थीं। आयोग की सदस्य ने पहले समीक्षा निपटाई। महिला फरियादियों की सुनवाई के
लिए उन्हें पेश किए जाने को कहा तो अधिकारी कुछ देर बंगले झांकने लगे। बाद
में एएसपी सुधीर कुमार सिंह के निर्देश पर पुलिस लाइन स्थित परिवार
परामर्श केंद्र पर पहले से दायर वाद की सुनवाई को पहुंची पीड़ित महिलाओं को
पुलिस के मुल्जिम ले जाने वाले ट्रक में भर कर गेस्ट हाउस पहुंचाया गया
तथा उन्हीं को एक-एक कर आयोग की सदस्य की सामने पेश किया गया। परिवार
परामर्श केंद्र से संबंधित करीब दो दर्जन मामलों से जुड़े दोनों पक्षों के
लोगों को पेश किया गया, लेकिन इनमें से एक भी मामले का निस्तारण मौके पर
नहीं हो सका।
पूरी सुनवाई एक दूसरे को गलत ठहराते रहे वादकारी
पीलीभीत।
जन सुनवाई के दौरान पुलिस प्रशासन ने अधिकांश उन्हीं लोगों को पेश किया था
जिनके वाद पहले से परिवार परामर्श केंद्र पर चल रहे हैं। दोनों पक्षों के
लोगों को जब इनके सामने पेश किया गया तो वह आयोग सदस्य के सामने ही एक
दूसरे को गलत ठहराने लगे। जिसके चलते खूब शोर शराबा भी हुआ। मौजूद उभय
पक्षों में से किसी ने पत्नी पर कच्ची शराब बेचने का आरोप लगाया तो किसी
महिला ने दहेज प्रताड़ना के चलते पति पर मारपीट कर घर से निकाल देने का
आरोप लगाया।
घुंघचाई क्षेत्र ओमप्रकाश का पुत्र व पुत्रवधू भी महिला
आयोग की सदस्य के सामने पेश हुए। पुत्रवधू का आरोप था कि उसके ससुराल में
कच्ची शराब का धंधा होता है। वह उससे यह धंधा करवाना चाहते हैं। मना करने
पर मारते पीटते हैं। जबकि पति का आरोप था कि उसकी पत्नी के मायके में कच्ची
शराब का धंधा होता है लिहाजा वह ससुराल में भी वही धंधा करना चाहती है।
रोकने पर दहेज प्रताड़ना का झूठा आरोप लगा घर बैठ गई है।
न्यूरिया थाना
क्षेत्र से आई रेखा ने बताया कि उसकी सात साल की एक बच्ची है। पांच साल
पहले उसका पति दहेज की खातिर उसे मारपीट कर घर से निकाल दिया है। परिवार
परामर्श केंद्र में कई बार सुनवाई के दौरान भी वह नहीं आता है। इस पर आयोग
की सदस्य ने अगली तारीख पर उसके पति को पुलिस भेज कर बुलवाने को कहा।
कमोवेश यही स्थिति अन्य वादों की रहीं।
लड़की पैदा की इस लिए घर से निकाल दिया
पीलीभीत।
थाना सुनगढ़ी क्षेत्र की एक विवाहिता की दर्द भरी दास्ता सुन आयोग की
सदस्य भी दंग रह गईं। यह महिला अपनी छोटी बहन व 12 साल की एक पुत्री के साथ
दुखड़ा सुनाने पहुंची थी। महिला ने बताया कि उसका मायका उत्तराखंड के
खटीमा थाना क्षेत्र के एक गांव में है। उसका पति थाना सुनगढ़ी क्षेत्र के
एक मोहल्ले में रहता है। करीब 17 साल पहले उसकी शादी हुई थी। पहली पुत्री
के बाद से ही ससुराल वाले उसे तंग करने लगे।
इसके बाद तीन और पुत्रियां
हुईं तो उत्पीड़न और बढ़ गया। सभी यह कह उसे रोज मारते पीटते थे कि यह
लड़की पैदा कर रही है। पांचवें नंबर की संतान के रूप में लड़का पैदा हुआ तब
भी ससुराल वाले खुश नहीं हुए। आरोप लगाया कि
उसका पति अब कहता है कि मायके
से वह उन लड़कियों की शादी के लिए दहेज के लिए पैसा लेकर आए। पिछले पांच
साल से वह मायके में रह रही है। उसकी छोटी बहन जब उसकी ससुराल गई तो आरोपी
पति व उसके परिवार वालों ने उसके साथ पांच मई को न सिर्फ मारपीट व अभद्रता
की बल्कि उसके कपड़े भी फाड़ दिए। थाने जाने पर पुलिस ने रिपोर्ट भी दर्ज
नहीं की।
मामला बेटी से जुड़ा था लिहाजा महिला आयोग की सदस्य इस पर
गंभीर हो गईं। उन्होंने एएसपी से मामले की जांच कर त्वरित कार्रवाई करने के
निर्देश दिए। एएसपी ने भी इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन आयोग
की सदस्य व पीड़ित को दिलाया।
पीड़ित महिलाओं को त्वरित न्याय दिलाना प्राथमिकता
पीलीभीत।
महिला आयोग की सदस्य असमा सिद्दीकी ने कहा कि महिला उत्पीड़न की बढ़ती
घटनाओं पर अंकुश लगाने व पीड़ितों को त्वरित न्याय दिलाना आयोग की
प्राथमिकता है। इसी के चलते महिला आयोग की सदस्य/अध्यक्ष माह के प्रथम
बुधवार को विभिन्न जिलों में जाकर जन सुनवाई कर रहीं हैं।
उन्होंने कहा
कि यहां जनसुनवाई में आम फरियादी नहीं दिखे। इसकी वजह प्रशासन द्वारा इसका
ठीक ढंग से प्रचार प्रसार न कराना रहा। अगली बार ऐसा नहीं होगा। इसके
निर्देश अधिकारियों को दे दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि समीक्षा के दौरान
परिवार परामर्श केंद्र में चल रहे दो वाद दो साल से निस्तारित न होना पाए
गए हैं।
इस पर अधिकारियों को इसके शीघ्र निस्तारण के निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने कहा कि उनकी सरकार बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के लिए जितना कार्य कर
रही है उतना किसी सरकार ने नहीं किया। उन्होंने कहा कि यहां सुनवाई के
दौरान पीड़ित गरीब महिलाओं को समाजवादी पेंशन का लाभ न मिलने की भी जानकारी
हुई है।
वह मुख्यमंत्री के संज्ञान में इस मामले को लाएंगी। उनका प्रयास
होगा कि वास्तविक रूप से पात्र जिले की महिलाओं को इस योजना का लाभ मिले।