गोमती महोत्सव में सुबह योग का अभ्यास कराया गया। इसके बाद यज्ञ में आहुतियां देकर विश्व कल्याण की कामना की गई। यज्ञ के बाद नेपाल से लाए गए सालिग्राम का विधि पूर्वक पूजन हुआ। पं. हरिशरण महाराज ने बताया कि यह सालिग्राम सत्य नरायन का भी स्वरूप हैं और नेपाल की गंडक नदी में स्वयं उत्पन्न होते हैं।
इस मौके पर उन्होंने कहा के देश का नाम यहां के चक्रवर्ती सम्राट भरत के नाम पर भारतवर्ष रखा गया है लेकिन आज हम अपनी संस्कृति के साथ इसकी पहचान भी भूलते जा रहे हैं और देश को कई नामों से पुकारा जाता है। शाम को उन्होंने श्रीमदभागवत कथा सुनाई जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा सुनने पहुंचे। भागवत कथा के साथ भजनों की अमृतावर्षा भी नेपाल से आई भजन मंडली द्वारा की गई।