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प्रशासन का चाबुक, 391 फर्म काली सूची में डाली

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पीलीभीत। मनरेगा में घोटालेबाजी रोकने के लिए डीएम ने सख्त रुख अपनाया है। तमाम अनियमितताएं मिलने के बाद 391 फर्म को काली सूची में डाल दिया है। उनसे अब किसी तरह काम नहीं लिया जाएगा। साथ ही पूर्व में इन फर्मों से किए गए लेनदेन का विस्तृत ब्योरा भी ब्लॉकवार तैयार कराने के निर्देश दिए हैं, ताकि आगे एफआईआर या रिकवरी की कार्रवाई तय की जा सके। डीएम की कार्रवाई के बाद मनरेगा, विकास विभाग में खलबली मच गई है।
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पिछले साल निजी फर्म और फर्जी मस्टररोल बनाकर मनरेगा में करोड़ों का घोटाला करने की शिकायत शासन स्तर पर हुई थी। सीडीओ की जांच में मामला सही पाया गया था। फिर अमरिया के एपीओ और तीन रोजगार सेवकों को बर्खास्त कर 27 अगस्त को जेल भेज दिया था। इसके बाद माधोटांडा के रोजगार सेवक और पूरनपुर के तकनीकी सहायकों की भी निजी फर्म निकलने पर बर्खास्त करते हुए एफआईआर कराई गई थी। घोटाले सामने आने के बाद डीएम पुलकित खरे ने मनरेगा में काम कर रही 2026 फर्मों की सूची तैयार कराकर सत्यापन के निर्देश दिए। निचले स्तर पर अधिकारी मामले को दबाने में जुट गए, मगर कई बार समीक्षा करते हुए डीएम ने अधिकारियों की जमकर क्लास लगाई। पिछले महीने डीसी मनरेगा, समस्त बीडीओ और एपीओ का वेतन भी रोक दिया था। खुद की गर्दन फंसती देख अधिकारी सकते में आ गए थे। जांच को गति दी गई तो बड़ी गड़बड़ी उजागर हुई। 339 फर्म के पंजीकरण के समय के कोई अभिलेख ही ब्लॉक से लेकर मुख्यालय तक नहीं मिल सके। मगर, उनसे लगातार काम लिया जा रहा था। 52 फर्म सिर्फ रिकॉर्ड में ही काम कर रही थी। धरातल पर जाकर उनका सत्यापन कराया गया तो फर्म होने के ही सबूत नहीं मिल पाए। इसकी रिपोर्ट बनाकर डीएम के समक्ष पेश की गई। फिर डीएम ने सख्ती अपनाई। सभी 391 फर्मों को काली सूची में डाल दिया है। समस्त बीडीओ से इन फर्मों को अपने रिकार्ड से भी हटाने को कह दिया गया है, ताकि इनसे आगे काम न लिया जाए। अगर ऐसा किया गया तो उन पर भी कार्रवाई तय है।
अभी और बढ़ सकती हैं मुश्किलें
391 फर्म को काली सूची में डालने कें बाद भी मुश्किल कम नहीं हुई है। इसे लेकर अभी और सख्ती का मन डीएम बना चुके हैं। इन फर्मों को पूर्व में कितने का भुगतान किया गया है। इसका डाटा भी ब्लॉाकवार तलब किया है। समस्त बीडीओ से इसकी जानकारी मांगी गई है। इसे लेकर जल्द समीक्षा भी होगी। बताते हैं कि अगर उसमें बीडीओ या फिर अन्य अधिकारी की भूमिका संदिग्ध निकलती है तो उसके खिलाफ भी शासन स्तर पर कार्रवाई के लिए लिखा जाएगा।
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33 कर्मचारियों के बदले गए थे कार्यक्षेत्र
मनरेगा में घोटाले रोकने को फर्म की जांच कराने के साथ ही डीएम ने लंबे समय से एक ही स्थान पर कार्यरत कर्मचारियों पर भी शिकंजा कसा था। ऐसे कर्मचारियों की सूची तैयार की गई। फिर 22 जनवरी को 24 तकनीकी सहायक, दो एपीओ और सात कंप्यूटर ऑपरेटरों के कार्यक्षेत्र में बदलाव किया था। यह सालों से एक ही ब्लॉक पर काम कर रहे थे।
मनरेगा में घोटाले रोकने के लिए फर्मों की जांच चल रही है। अभी तक हुई जांच में 52 फर्म ऐसे थीं, जिनके धरातल पर होने के ही प्रमाण नहीं मिले। 339 फर्मों के पंजीकरण के समय जमा किए जाने वाले महत्वपूर्ण अभिलेख पैनकार्ड, आधार कार्ड आदि कुछ नहीं मिल सका। ऐसे में सभी को काली सूची में डाल दिया है। जल्द फिर से समीक्षा की जाएगी। - पुलकित खरे, डीएम
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